भारत में भूकंप जोखिम को लेकर सबसे बड़ा वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन करते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने नया अर्थक्वेक डिजाइन कोड और अपडेटेड भूकंपीय जोनेशन मानचित्र जारी किया है। इस नए मैप में पूरे हिमालयी क्षेत्र को पहली बार सबसे अधिक खतरे वाले जोन-VI में रखा गया है, जिसमें उत्तराखंड का पूरा क्षेत्र शामिल है। पहले राज्य के बड़े हिस्से (देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार ) को Zone-IV में और धारचूल, मुनस्यारी, उत्तरकाशी को जोन-V में रखा जाता था। नए मैप के लागू होते ही देश के 61% हिस्से को अब मध्यम से उच्च खतरे की श्रेणी में माना गया है, जो पहले 59% था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पिछले कई दशकों में भूकंपीय जोखिम आकलन का सबसे बड़ा बदलाव है। वैज्ञानिकों की समझ में बड़ा बदलाव डॉ. विनीत कुमार गहलोत, निदेशक, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने कहा कि सिस्मिक जोनिंग मैपिंग का काम ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड करता है। अभी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने एक नया मैप जारी किया है। उस मैप में काफी परिवर्तन किए गए हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन हिमालयन रीजन में है। उन्होंने कहा कि पहले अगर उत्तराखंड को देखें तो वह दो भागों में था। उत्तराखंड में एक जोन 5 था, जो धारचूला और मुनस्यारी या उत्तरकाशी के आस-पास का इलाका था। बाकी नीचे के इलाकों की बात करें, जिसमें देहरादून, ऋषिकेश या कोटद्वार के ऊपर की बात करें, तो वह जोन 4 में था। पहले सिस्मिक अंडरस्टैंडिंग ये थी कि धारचूला में खतरा ज्यादा है और देहरादून में कम है। पूरी हिमालय बेल्ट को एक साथ Zone-6 में क्यों रखा गया डॉ. विनीत कुमार गहलोत ने कहा कि अपनी गणनाओं या केलकुलेशन के आधार पर, कमेटी ने पूरे हिमालय क्षेत्र को जोन-6 में डाल दिया है। यह सब सेफ्टी से संबंधित है, जब आप कोई इमारत बनाएंगे तो भूकंप के लिहाज़ से उसमें कितनी सुरक्षा रखनी होगी। अब उत्तराखंड में निर्माण मानक एक जैसे होंगे डॉ. विनीत कुमार गहलोत के मुताबिक, अगर पुराने मैप को देखें, तो उदाहरण के लिए पिथौरागढ़ में कोई हाइड्रो डैम बनाया जाए या धारचूला में या देहरादून में बनाया जाए, तो सभी में अंतर होता। आज की तारीख में अब कोई अंतर नहीं होगा। जो सेफ्टी मेजर्स वहां लिए गए हैं, वही देहरादून में भी लागू होंगे। जितनी स्ट्रैन्थ वहां दी गई है उतनी ही यहां दी जाएगी। पूरे हिमालय क्षेत्र को यूनिफॉर्म तरीके से ट्रीट किया गया है, जो कि एक अच्छी बात है। भूकंप खतरे का वैज्ञानिक आधार हिमालय के नीचे लगातार बढ़ा तनाव, इसलिए एक समान खतरा। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, नया मानचित्र अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित प्रायिक भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन (PSHA) से तैयार किया गया है, जिसमें सक्रिय फॉल्ट्स, अधिकतम संभावित भूकंप और जमीन की प्रतिक्रिया का विस्तृत अध्ययन शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार पुराने मानचित्र में हिमालयी क्षेत्र की वास्तविकता को अधूरा समझा गया था। दो जोनों की सीमा वाले शहर भी अब उच्च जोखिम में नए मैप के तहत वे सभी शहर जो दो सिस्मिक (जोन-4 और जोन-5) की सीमा पर स्थित हैं, उन्हें सीधे उच्च श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इससे शहरी योजनाकार और इंजीनियर पुराने जोखिम-अनुमानों पर निर्भर नहीं रहेंगे।
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