लखनऊ के सीतापुर रोड योजना कॉलोनी स्थित श्रीरामलीला पार्क में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथाव्यास पं. गोविंद मिश्रा ने घरों में बढ़ती कलह का मुख्य कारण मोबाइल फोन और टीवी सीरियल को बताया। यह कथा विश्वनाथ मंदिर के 34वें स्थापना दिवस पर आयोजित की जा रही है। पं. मिश्रा ने कहा कि मोबाइल फोन ने परिवार के सदस्यों को अलग-अलग कमरों तक सीमित कर दिया है। वहीं, टीवी सीरियल रिश्तों को जोड़ने के बजाय तोड़ने की सीख दे रहे हैं, जिससे अनावश्यक विवाद और रिश्तों में दरार पैदा हो रही है। उन्होंने भागवत कथा के संदेश को समाज में बढ़ती आपसी दूरी, अविश्वास और बाहरी दिखावे की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। जय श्री नारायण’ के उद्घोष से गूंजा पंडाल कथाव्यास ने भक्त प्रह्लाद के प्रेरक प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान विष्णु के प्रति प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने हिरण्यकश्यप के अत्याचारों पर विजय प्राप्त की। नरसिंह अवतार की कथा सुनते ही पूरा पंडाल ‘जय श्री नारायण’ के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके बाद पं. मिश्रा ने जड़ भरत की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि बाहरी रूप से असामान्य दिखने वाला व्यक्ति भी भीतर से अत्यंत उच्च, धैर्यवान और ज्ञानवान हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में लोग अक्सर व्यक्ति को उसके बाहरी रूप-रंग से आंकते हैं, जबकि उसकी असली पहचान उसके कर्म और आत्मिक शक्ति में निहित होती है। वर्तमान पीढ़ी को प्रह्लाद से प्रेरणा लेनी चाहिए युवाओं को संदेश देते हुए कथाव्यास ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को प्रह्लाद के धैर्य और सत्य के प्रति निष्ठा से प्रेरणा लेनी चाहिए। जड़ भरत की कथा यह सिखाती है कि किसी के बारे में राय बनाने से पहले उसे गहराई से समझना आवश्यक है।इस अवसर पर बाल निकुंज स्कूल्स एंड कॉलेजेज के एमडी एचएन जायसवाल, कोऑर्डिनेटर सुधीर मिश्रा, प्रिंसिपल रश्मि शुक्ला, शैलेन्द्र सिंह और अरविंद दीक्षित सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।कथा समापन में वृंदावन से आए कलाकारों ने मुनि आगमन और ताड़का वध का सजीव मंचन प्रस्तुत किया।
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