छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए शहर और समाज की समस्याओं को हल करने की तैयारी में है। यूनिवर्सिटी ने अपने शिक्षकों के लिए एक खास स्कीम ‘CAM-AI रिसर्च प्रोजेक्ट्स’ (CAM-AI RPS) शुरू की है। इस योजना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि अब रिसर्च सिर्फ फाइलों या रिसर्च पेपर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षकों को वर्किंग एआई प्रोडक्ट, मोबाइल ऐप या कोई स्मार्ट सिस्टम बनाकर देना होगा। आईडिया दमदार हुआ तो मिलेगी 10 लाख की फंडिंग यूनिवर्सिटी ने इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा है। बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट (Major Projects) के लिए शिक्षकों को अधिकतम 10 लाख रुपए तक की आर्थिक मदद दी जाएगी, जिसे 12 महीने में पूरा करना होगा। वहीं छोटे प्रोजेक्ट (Minor Projects) के लिए 5 लाख रुपए तक का बजट मिलेगा, जिसकी समय सीमा 6 महीने तय की गई है। इस बजट का इस्तेमाल तकनीक विकसित करने और प्रोटोटाइप बनाने में किया जाएगा। इनोवेशन पर जोर: चैटबॉट और डैशबोर्ड बनाना जरूरी यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि रिसर्च का फायदा समाज को तभी मिलेगा जब उसका कोई प्रैक्टिकल इस्तेमाल हो। इसीलिए हर प्रोजेक्ट में कम से कम एक वर्किंग एआई प्रोडक्ट बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें एआई चैटबॉट, डेटा डैशबोर्ड, आईओटी (IoT) सिस्टम या कोई खास वेब एप्लीकेशन शामिल हो सकती है। जो शिक्षक एआई, मशीन लर्निंग या डेटा साइंस में थोड़ी भी समझ रखते हैं, वे इसमें हिस्सा ले सकते हैं। खेती से लेकर कानून तक, हर क्षेत्र में दिखेगा एआई का दम यह स्कीम किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा, सेहत, स्मार्ट कैंपस, खेती-किसानी, फाइनेंस, कानून और रोबोटिक्स जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। एक्सपर्ट कमेटी उन प्रस्तावों को चुनेगी जो नए हों, जिन्हें हकीकत में लागू किया जा सके और जिनसे किसी वास्तविक समस्या का समाधान निकलता हो। इसमें अलग-अलग विभागों के शिक्षक मिलकर भी काम कर सकेंगे।

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