काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र,भारतीय ज्ञान परम्परा, तकनीकी प्रद्योगिकी, स्वास्थ्य, योग,आयुर्वेद राष्ट्रनिर्माण और डिजिटल मीडिया की पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श हुआ। भारत छात्र आध्यात्मिक और वैज्ञानिक शिक्षा प्राप्त करने आते थे- रामेश जी मुख्य वक्ता आरएसएस काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी ने भारत के प्राचीन सांस्कृतिक वैभव, आध्यात्मिक ज्ञान और विश्वकल्याण की भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सदैव विश्व के लिए अध्यात्म और ज्ञान केंद्र रहा है, जहाँ दुनिया भर से छात्र आध्यात्मिक और वैज्ञानिक शिक्षा प्राप्त करने आते थे। उन्होंने बताया कि मालवीय की दूरदृष्टि के कारण आज भी काशी शिक्षा और संस्कृति का केंद्र है। देश भर से आये शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान के रूप में होना चाहिए। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की प्रेरक जीवनगाथा सुनाकर युवाओं में राष्ट्रभावना का संचार किया।उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों की रक्षा करते हुए हम विकसित भारत की राह पर चल पड़े हैं यह यात्रा युवाओं के लिए चुनौती भी है और साध्य भी। अंत में उन्होंने प्रेरक कविता की पंक्तियाँ सुनाईं— भारत फिर भरपूर बनेगा,नहीं कोई कमी होगी,वीरों से धरा भरी, मोतियों से भरी ज़मीन होगी।” कृषि पत्रकारिता को बढ़ावा मिलना चाहिए- कुलपति अवध विश्वविद्यालय सम्मेलन समापन सत्र के मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि काशी संस्कृति,अध्यात्म और शैक्षिक चेतना की जन्म स्थली है।विकसित भारत यह शंखनाद काशी से पूरे देश को दिशा देगा क्योंकि इस यज्ञ में दूर दूर से शोध करने वाले शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मकता, समय प्रबंधन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को विकसित भारत के लिए अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा के आदर्श-अनुशासन, संयम और ज्ञान-युवाओं के जीवन में वापस आने चाहिए। उन्होंने कहा कि महामना के विचार स्वदेशी, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर भारत को लेकर थी वही आज विकसित भारत के लक्ष्य का मुख्य विषय है।कहा कि जीवन और जगत की सत्यता को स्वीकार करते हुए हर भारतीय विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि कृषि पत्रकारिता को बढ़ावा मिलना चाहिए जिससे भारतीय ज्ञान परम्परा और नवाचार दोनों को भारतीय किसान जान सके।उन्होंने शोधकर्ताओं का आह्वान किया वे नवाचार, शिक्षा और भारतीय संस्कृति इन तीनो का समन्वय बनाकर चले और निरन्तर अग्रणी भारत के लिए काम करें। विकसित भारत 2047 हेतु एक रोडमैप का काम करेगा-डॉ ज्ञान प्रकाश कार्यक्रम आयोजक डॉ ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि यह सम्मेलन पूरे देश के शोधकर्ताओं के लिए विकसित भारत 2047 हेतु एक रोडमैप का काम करेगा और हर शोध पत्र एक विषय अध्ययन का विषय होगा। कहा कि भारत हमेशा से ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ के मार्ग पर चलता आया है। भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि मूल्य, नैतिकता और ज्ञान का विश्वगुरु रहा है।” उन्होंने देश–विदेश से आए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।इस सम्मेलन में श्री लंका,बंगलादेश, नेपाल,यूके यूएस सहित भारत के सभी राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया ।
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