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लखनऊ में राज्य नाट्य समारोह शुरू:’मांझी रे’ नाटक ने दशरथ मांझी का संघर्ष दिखाया

लखनऊ में कला और रंगमंच का दो दिवसीय राज्य नाट्य समारोह शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित यह समारोह गोमती नगर स्थित संत गाडगे महाराज ऑडिटोरियम में दो दिवसीय हो रहा है। इसमें दो प्रमुख नाटकों का मंचन किया जा रहा है। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर ने इसका उद्घाटन किया।समारोह की पहली संध्या पर ‘मांझी रे’ नाटक का मंचन किया गया। पंचम प्रकाश द्वारा लिखित और सागर सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के संगीत एवं नाट्य विभाग की प्रस्तुति थी। नाटक ने ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’ का संदेश दिया। पहाड़ काटकर रास्ता बनाने के संकल्प को दिखाया यह नाटक ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के वास्तविक जीवन संघर्ष पर आधारित है। इसमें एक गरीब मजदूर की जिंदगी, पत्नी की मौत और पहाड़ काटकर रास्ता बनाने के उनके संकल्प को दर्शाया गया।नाटक में दिखाया गया कि कैसे समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मांझी की पत्नी की मृत्यु हो जाती है। इस घटना के बाद, मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का संकल्प लिया, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों के उपहास के बावजूद, उन्होंने वर्षों की मेहनत से यह असंभव कार्य पूरा किया। कलाकारों ने बेहतर प्रस्तुति दी मंचन में कलाकारों ने प्रभावी अभिनय किया। दशरथ मांझी की भूमिका रौशन कुमार दास ने निभाई, जबकि प्राची कुमारी फगुनिया के किरदार में थीं। संगीत, प्रकाश और मंच सज्जा ने प्रस्तुति को सशक्त बनाया।समारोह के दूसरे दिन 25 मार्च को कानपुर की अनुभूति नाट्य इकाई द्वारा ‘दिल की दुकान’ नाटक का मंचन किया जाएगा। रतन सिंह राठौर के निर्देशन में यह प्रस्तुति शाम 6:30 बजे दर्शकों के सामने आएगी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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