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शिक्षा का अधिकार अधिनियम से पहले नियुक्त शिक्षकों का प्रदर्शन:टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ मशाल जुलूस, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

कन्नौज में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन किया। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने मंगलवार शाम मशाल जुलूस निकाला और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा। यूनाइटेड शिक्षक संघ के सदस्य मंगलवार शाम गैस एजेंसी क्रॉसिंग के पास ब्लॉक संसाधन केंद्र पर एकत्र हुए। यूटा के जिलाध्यक्ष पंकज भदौरिया और जिला संरक्षक विवेक सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष पंकज भदौरिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 29 जुलाई 2011 को लागू हुआ था। इस अधिनियम में प्रावधान था कि इसके लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलेगी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा जारी संशोधित अधिनियम संख्या 24 ऑफ 2017 के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 तक सभी शिक्षकों के लिए दो साल में टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। भदौरिया ने कहा कि इस फैसले से देश भर के लाखों शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। यूटा ऐसे शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए सरकार से लेकर कोर्ट तक संघर्ष करेगा। जिला संरक्षक विवेक सिंह और शैलेंद्र दुबे ने शिक्षकों से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया। धरना-प्रदर्शन के बाद, शाम 6 बजे शिक्षकों ने बीआरसी कार्यालय से गोल कुंआ चौराहे तक मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान उन्होंने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। बाद में, प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त एसडीएम को सौंपा गया। इस कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयोजक दिलीप यादव, जूनियर शिक्षक संघ से राम किशोर, नीरज यादव, सुधीर सिंह, महेंद्र कुशवाह, अरविंद दुबे, महिला शिक्षक संघ की उपाध्यक्ष सरिता गौतम, ममता सिंह, श्रद्धा चौहान, राधा बौद्ध, अनुराग त्रिपाठी, रवि मोहन त्रिपाठी सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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