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नाव पर तैरती हुई दिखी लखनवी तहजीब:साहित्यकार-शायर हुए सवार, पानी में दिखा शायराना अंदाज

लखनवी तहजीब को बढ़ावा देने के लिए रविवार को द गोमती बोट ट्रेल का आयोजन किया गया। रंग-ए-अवध द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शहीद स्मारक स्थित गोमती तट पर लोगों का जमावड़ा लगा। नवाब मसूद अब्दुल्लाह , एडवोकेट मेराज हैदर के साथ शायर मोहम्मद साहिल, कुंवर जावेद अली , हसन काजमी और बलवंत सिंह की शायरी ने लोगों का दिल जीत लिया। पहली बार लखनऊ की तहज़ीब पानी पर तैरती नज़र आई । संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल थी। सर्दियों की नरम दोपहर में हल्की सर्द हवा और धीमी सुनहरी धूप के बीचब नाव की मद्धम लहराती चाल में लखनऊ की तहजीब के चर्चे हो रहे थे। शायरों कि कविताओं और गजलों ने गोमती नदी की नरम लहरों पर जीवंत रूप दिया गया। इस खास मौके पर नाव को बेहद खास अंदाज में सजाया गया था। जिसपर बैठकर लोग लाइव म्यूज़िक, शायरी, ग़ज़ल, नौका-विहार का आनंद उठा रहे थे। नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने कहा कि शहर की तहजीब और संस्कृति को जिंदा रखना हम सब की जिम्मेदारी है। इस खास मौके पर हम लोग शहर के विभिन्न रंगों को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए जमा हुए । नवाबों के समय इस तरह के आयोजन होते थे जब सजी हुई नाव में नवाब अपनी बेगम के साथ निकलते थे उसी कल्चर को दोहराने की कोशिश किया है। इस दौरान सुनाए गए कुछ शेर यहां पढ़िए नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने पढ़ा- खुदा आबाद रखे लखनऊ फिर भी गनीमत है नजर कोई न कोई अच्छी सूरत आ ही जाती है प्रोफेसर बलवंत सिंह ने पढ़ा- महंगे पोशाकों से जाहिल पन ढका करते है हम क्या है बीमारी और क्या दवा करते हैं हम सीखनी होती है जब बारीकियां तहजीब की लखनऊ वालों से जाकर राब्ता करते हैं हम जमाने भर में जो रुसवा हुआ है मोहब्बत में यही अच्छा हुआ है हमारे गम का अंदाजा लगाओ हमारे घर में बंटवारा हुआ घर घर में भी तो हो सकता था अपने कचहरी में जो समझौता हुआ है। मोहम्मद साहिल ने सुनाया- तहजीब-ए- शहर कितनी बदल दी है वक्त ने अपनी रिवायतों को भुलाने लगे हैं लोग


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