अयोध्या के रौनाही क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी भूमि पर बने विवादित ईदगाह को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का धरना प्रदर्शन में रात समाप्त हो गया। यह धरना जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद खत्म हुआ। एसडीएम सविता राजपूत के निर्देश पर गठित राजस्व टीम के साथ तहसीलदार मौके पर पहुंचे और विवादित स्थल के चारों ओर भूमि का सीमांकन कराया। जानकारी के अनुसार, शनिवार को हुई स्थलीय पैमाइश में 42.9 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया। इसके बाद एडीएम प्रशासन, एसपी ग्रामीण, सीओ सदर, एसडीएम और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों से वार्ता की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद ही रात में धरना समाप्त हुआ। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के जिला महामंत्री लाल जी शर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी अयोध्या ने 21 दिन के भीतर सभी मामलों का निस्तारण करने का आश्वासन दिया है।उन्होंने यह भी बताया कि जिलाधिकारी ने कहा है कि ‘लैंड जिहादियों’ पर लोक संपत्ति अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि जिन लोगों ने जितनी जमीन पर अतिक्रमण किया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी की जाएगी। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिन्होंने जांच रिपोर्ट में हेरफेर की और पुराने समय से तहसील के कर्मचारी इस मामले में संलिप्त रहे, जिन्होंने हिंदुओं के मकान टूटने के बाद भी ईदगाह को नहीं मापा और न ही हटाया। लाल जी शर्मा ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद ने एडीएम प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह और अधिशासी अभियंता लोक निर्माण शशि भूषण सिंह पर आरोप लगाया है। विहिप का कहना है कि इन अधिकारियों ने ‘लैंड जिहादियों’ को बढ़ावा दिया और उनके मंसूबों को बुलंद किया।दो बार जेसीबी मशीन मौके पर गई, लेकिन इन्हीं अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। विहिप ने ऐसे अधिकारियों की गहन जांच कर कार्रवाई की मांग की है। विश्व हिंदू परिषद का यह भी कहना है कि नाप-जोख के समय जो भी दस्तावेज इससे जुड़े हैं, उन्हें अवगत कराया जाए। प्रशासन ने कार्रवाई के लिए 21 दिन का समय मांगा है।
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