गैस सिलेंडर की बढ़ती किल्लत के बीच कॉमर्शियल सिलेंडरों के उपयोग के लिए नई गाइड लाइन जारी की गई है। मंगलवार को डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस पर चर्चा हुई। कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में आ रही समस्याओं के समाधान की रूपरेखा की तैयार की गई। ऑयल कंपनियों ने दी मंत्रालय के निर्देश की जानकारी
बैठक में ऑयल कंपनियों के अधिकारी और आपूर्ति विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसमें ऑयल कंपनियों के अधिकारियों ने बताया-भारत सरकार के पेट्रोलियम एंव प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जो निर्देश दिए हैं, उसके अनुसार, कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को 2 श्रेणियों में बांटा गया है। पहली अति आवश्यक सेवाएं, जिसमें चिकित्सालय, शक्षिक संस्थान, रेलवे दि शामिल हैं। दूसरी श्रेणी को आवश्यक श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इसमें रेस्टोरेंट, होटल, ढाबा, गेस्ट हाऊस आदि शामिल हैं। अति आवश्यक सेवाओं के कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को उनके 3 महीने के औसम उपभोग के 20% तथा आवश्यक सेवाओं के कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को उनके 3 महीने के औसत उपभोग के 10% के बराबर कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति की जाए। हर महीने 2 सिलेंडर ही मिलेंगे
उदाहरण देते हुए बताया-यदि कोई कामिर्शयल उपभोक्ता 3 महीने में 30 कॉमर्शियल सिलेंडर का उपभोग करता है तो उसका हर महीने का औसत 10 कॉमर्शियल सिलेंडर है। नई गाइड लाइन के अनुसार, अब इसका 20% अर्थात 2 सिलेंडर हर महीने मिलेंगे। डीएम ने निर्देश दिए कि पेट्रोलियम एंव प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति की जाए। उन्होंने कहा-जमाखोरी व डायवर्जन पर विशेष निगरानी रखते हुए अंकुश लगाया जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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