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जानिए क्यों खास है पिथौरागढ़ का आदि कैलाश:भगवान शिव को भी इस जगह से था प्रेम, PM मोदी के दौरे से मिली नई पहचान

पिथौरागढ़। जिस तरह से तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव की भूमि माना जाता है उसी तरह से पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में स्थित आदि कैलाश को भगवान शिव का प्राचीन निवास स्थल कहा जाता है। माना जाता है कि आदि कैलाश में भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते थे। इस स्थल का उल्लेख स्कंद पुराण में भी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में गुंजी से 36 किलोमीटर की दूरी पर आदि कैलाश स्थित है। आदि कैलाश का महत्व भी कैलाश के बराबर का ही माना जाता है। कैलाश पर्वत में मानसरोवर झील है तो आदि कैलाश में पार्वती सरोवर है। मानसरोवर झील की तरह ही पार्वती सरोवर में स्नान से पुण्य मिलता है। भगवान शिव ने आदि कैलाश में लंबे समय तक किया था प्रवास आदि कैलाश को भगवान भोलेनाथ का प्राचीन निवास स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव जब माता पार्वती से विवाह कर कैलाश जा रहे थे तो वह इसी स्थान पर रुके थे। भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के साथ भी इस स्थान पर लंबे समय तक रहे। आदि कैलाश में माता पार्वती के नाम पर पार्वती सरोवर स्थित है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने इस स्थान पर धान बोए थे। माना जाता है कि भगवान शिव को इसलिए यह स्थान बेहद प्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद मिली वैश्विक पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में स्थित आदि कैलाश को वैश्विक पहचान मिली है। पहले यहां गिने चुने पर्यटक ही आते थे। साल 2023 में प्रधानमंत्री के आने के बाद पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। पिछले दो सालों से 35 हजार से अधिक पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। 1971 में किया था शिव पार्वती मंदिर का निर्माण आदि कैलाश में पार्वती सरोवर के समीप शिव पार्वती का मंदिर स्थित है। इस मंदिर की नींव वर्ष 1971 में कुटी गांव के तीन लोगों ने रखी थी। इनमें श्रीकृष्ण सिंह कुटियाल, जय सिंह कुटियाल और केदार सिंह कुटियाल शामिल थे। मंदिर का निर्माण करने के बाद ग्रामीणों ने विधिवत पूजा अर्चना शुरू की। अब इस मंदिर के कपाट मई में खुलते हैं और नवंबर में बंद हो जाते हैं। आदि कैलाश में स्थापित की नंदी की प्रतिमा आदि कैलाश 20-20 ग्रुप ने साल 2024 में आदि कैलाश में नंदी बैल की प्रतिमा स्थापित की थी। 40 क्विंटल वजनी इस प्रतिमा को अलवर राजस्थान में तैयार कर यहां लाया गया था। 14,500 फुट की ऊंचाई पर पार्वती सरोवर के समीप नंदी की प्रतिमा भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। इसी ग्रुप के सदस्यों ने वर्ष 2022 में आदि कैलाश में 150 किलो वजनी 28 फुट ऊंचा त्रिशूल स्थापित किया था। यह त्रिशूल कुंड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है।


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