DniNews.Live

ट्रंप के ऑर्डर से हिला पूरा पाकिस्तान, अब खतरनाक बवाल शुरू!

मिडिल ईस्ट में जंग की आग अब सिर्फ गोलियों और बता दें कि मिसाइलों तक सीमित नहीं रही है। अब बता दें कि इस युद्ध में एक ऐसे देश की एंट्री हो रही है जो खुद बहुत ही ज्यादा आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लेकिन फिर भी चौधरी बनने की जो कोशिश है वो लगातार यहां पर सामने आ रही है। पाकिस्तान से अब एक ऐसी कूटनीतिक चाल चली जा रही है जो इस पूरे युद्ध का यानी कि मिडिल ईस्ट के युद्ध का रुख बदल सकती है या फिर कहें तो इसे और भी ज्यादा खतरनाक भी बना सकती है। दरअसल बता दें कि ट्रंप ने अचानक एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है और इसके बाद पर्दे के पीछे की कहानी शुरू हो गई है। यानी कि डिप्लोमेसी की सबसे खतरनाक बाजी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इस्लामाबाद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का केंद्र बनाया जाया जा सकता है। सूत्र यह बता रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी नहीं बल्कि बैक चैनल बातचीत चल रही है और इसमें पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और खाड़ी देश जो हैं वो भी मौजूद है जो मैसेज कैरियर का यहां पर काम कर रहे हैं और इस संभावित बातचीत में शामिल हो सकते हैं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इसी के साथ ही बता दें कि अमेरिका के विशेष दूत वहीं ईरान की बात करें तो ईरान की तरफ से राष्ट्रपति का नाम सामने आया है। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार क्यों आर्थिक रूप से कमजोर और कर्ज में डूबा पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है?

इसे भी पढ़ें: चापलूस नहीं, दबंग हूं…पाकिस्तान के असली जमील जमाली को नहीं रास आया धुरंधर-2 का Reel वाला किरदार

पाकिस्तान खुद को फिर से वैश्विक खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करना चाहता है या अपने आप को उस छवि के तौर पर पेश करना चाहता है। दूसरा सऊदी एंड यूएस कनेक्शन। इस पहल की शुरुआत हुई थी सऊदी से। जहां बता दें कि सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने यह प्रस्ताव रखा गया था। अब बात करते हैं तीसरे कारण की यानी कि स्ट्रेटेजिक पोजीशनिंग की। अगर यह बातचीत सफल होती है तो पाकिस्तान को मिल सकता है राजनीतिक और आर्थिक फायदा। और यहीं पर कहानी में आता है बहुत बड़ा ट्विस्ट। कुछ रिपोर्ट्स ये दावा करती है कि पाकिस्तान सिर्फ मध्यस्थ ही नहीं बल्कि एक बड़ा डबल गेम भी खेल रहा है। ये कहा जा रहा है और यह दावा सामने आया है कि वो ईरान को बातचीत में उलझाकर अमेरिका को रणनीतिक बढ़त दिलाने की कोशिश कर सकता है। यानी कि अमेरिका की चापलूसी यहां पर कर सकता है।

इसे भी पढ़ें: एयरफोर्स स्टेशन में काम करने वाला निकला देश का गद्दार, भारत के सीक्रेट शेयर करने के लिए पाकिस्तान से मिले कितने पैसे?

दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई यहीं से गुजरती है। ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद ही कर दिया है और यहां पर बिल्कुल यह साफ कर दिया है कि जब तक हमले नहीं रुकेंगे तब तक रास्ता नहीं खुलेगा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स लगातार हमले कर रही है। वहीं बता दें कि नेतन याू ने भी यहां पर साफ यह कहा है कि सैन्य कारवाई जारी रहेगी। मतलब एक बात बिल्कुल साफ है। ऊपर बातचीत का ढोंग जरूर चल रहा है लेकिन नीचे युद्ध भी है। तो सवाल अब भी यही है कि क्या पाकिस्तान सच में शांति का रास्ता बना रहा है या फिर यह एक सोची समझी चाल है जो इस युद्ध को और भी ज्यादा खतरनाक बना सकती है। 
Source: Prabha Sakshi via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *