प्रयागराज में उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू संबद्ध) के आह्वान पर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर आशा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन लंबित भुगतान, भुगतान में अनियमितताओं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के रवैये के विरोध में था। प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता सीएमओ कार्यालय पहुंचीं। उनका उद्देश्य अपने बकाया भुगतान की जानकारी प्राप्त करना था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान डीसीपीएम ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके काम पर सवाल उठाए। यूनियन ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास बताया।
यूनियन नेताओं ने बताया कि 6 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई वार्ता के बाद 55 दिनों तक चला आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। उस समय सरकार ने अधिकांश मांगों पर सहमति जताते हुए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में एक 5 सदस्यीय कमेटी गठित की थी। तीसरे चरण की वार्ता में अंतिम निर्णय का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह वार्ता अब तक नहीं हो सकी है। आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023-24 तक का भारी भुगतान लंबित है। इसके अतिरिक्त, 2024-25 और 2025-26 के लिए बजट जारी होने के बावजूद अधिकांश कार्यकर्ताओं को भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। जहां भुगतान हुआ भी है, वहां अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। आभा आईडी, आयुष्मान कार्ड, टीबी, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग और अन्य स्वास्थ्य अभियानों के तहत किए गए कार्यों का भुगतान भी वर्षों से अटका हुआ है। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं से वैक्सीन कोरियर का काम कराया जा रहा है, जिसके लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता। शिकायत करने पर कार्यकर्ताओं को धमकाया जाता है और भुगतान में पारदर्शिता का अभाव है। यूनियन ने डीसीपीएम के दुर्व्यवहार और लंबित भुगतान के विरोध में 10 अप्रैल को सीएमओ कार्यालय पर एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। मंगलवार के प्रदर्शन में ऐक्टू के राज्य सचिव अनिल वर्मा, जिला सचिव देवानंद सहित कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता उपस्थित थीं।

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