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सहरसा में बाल उमंग पखवाड़ा संपन्न:अलबेला ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई क्रिएटिविटी, छात्राओें ने दी रंगारंग प्रस्तुति

सहरसा के किलकारी बिहार बाल भवन में बाल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बाल उमंग पखवाड़ा’ का समापन शुक्रवार को हुआ। 13 से 30 नवंबर तक चलेने वाले इस कार्यक्रम में सैकड़ों बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समापन समारोह का मुख्य आकर्षण अलबेला ड्रेस प्रतियोगिता रही। बिहू नृत्य, सावन की प्रस्तुति और बिहार के लोकगीतों से बांधा समा समापन समारोह का आरंभ विद्यालयों के प्रतिनिधियों, अभिभावकों, किलकारी टीम और बच्चों की ओर से संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बच्चों ने बिहू नृत्य, सावन की प्रस्तुति और बिहार के लोकगीतों पर आधारित नृत्य सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने “रचनात्मकता और आनंद के साथ सीखना” के संदेश को प्रभावी ढंग से दर्शाया। पर्यावरण संरक्षण और विज्ञान विषयों पर परिधानों का प्रदर्शन अलबेला ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, हस्तकला और सामाजिक विषयों पर आधारित स्वनिर्मित परिधानों का प्रदर्शन किया। उनकी अनोखी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता की निर्णायकों तथा अभिभावकों ने सराहना की। चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की इस अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की गई। विभिन्न श्रेणियों में चयनित बच्चों को मंच पर सम्मानित किया गया और प्रतिभागियों को प्रोत्साहन प्रमाणपत्र दिए गए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में ज्ञानवी, नेहा, अंजलि, श्वेता, शिवानी, सिमरन, पल्लवी, आरुषी, अवनि, अदिति, कृतिका, रिमझिम, परी, नंदनी सहित कई बच्चों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक प्रणव भारती ने बताया कि बाल दिवस को केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे माह उत्साह और सीखने के अवसर के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि इस पखवाड़े ने बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने, नई योग्यताएं सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का मंच प्रदान किया। बच्चों ने कला, हस्तकला, खेल, साहित्यिक गतिविधियों और सामाजिक विषयों पर मॉडल व पोस्टर बनाकर जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में महत्वपूर्ण सीख हासिल की। कार्यक्रम का मंच संचालन आयुषी ने किया। इसे सफल बनाने में मधु कुमारी, विश्व विजय झा, मौसमी कुमारी, अन्नू कुमारी, आयुष राज, विकास भारती, निभाष कुमार, आर्ची कुमारी, शिखा कुमारी, प्रेरणा कुमारी सहित सभी प्रशिक्षकों और कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


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