औरंगाबाद के व्यवहार न्यायालय में दहेज हत्या के मामले में जिला जज पंचम उमेश प्रसाद ने शुक्रवार को सज़ा का फैसला सुनाया। हसपुरा थाना कांड संख्या 279/23 से जुड़े इस मामले में अदालत ने मृतका के पति विकास कुमार, ससुर योगेंद्र राजवंशी और सास जोखन देवी को कई धाराओं में दोषी पाते हुए सात साल सश्रम कारावास सहित विभिन्न अवधि की सजाएं सुनाई हैं। एपीपी शिवपूजन प्रजापति के अनुसार अदालत ने तीनों अभियुक्तों को भादंवि धारा 304(B) (दहेज मृत्यु) में सात वर्ष सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना की सज़ा दी है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं भादंवि धारा 120(B) (आपराधिक साजिश) में भी सात वर्ष की सज़ा और पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके अतिरिक्त भादंवि धारा 201 (सबूत छिपाने) में दो वर्ष का कारावास और एक हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया है, जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त सज़ा होगी। दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी छह महीने का कारावास और एक हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजा एक साथ चलेंगी। 25 नवंबर को तीनों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था उल्लेखनीय है कि अदालत ने 25 नवंबर 2025 को तीनों अभियुक्तों को सभी आरोपों में दोषी करार दिया था। इस मामले में प्राथमिकी 10 अक्टूबर 2023 को कदवरी चेचाडी, ओबरा निवासी नंद राजवंशी ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि अपनी बेटी प्रियंका कुमारी की शादी विकास कुमार से की थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही लड़के पक्ष द्वारा 50 हजार रुपए की दहेज मांग की जाने लगी और मांग पूरी न होने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी। प्राथमिकी के अनुसार 7 अक्टूबर 2023 को अभियुक्तों ने प्रियंका की हत्या कर शव को छुपाकर अंत्येष्टि कर दी और इसके बाद घर छोड़कर फरार हो गए। घटना के बाद से ही पति विकास कुमार जेल में बंद है। अदालत के इस निर्णय ने मृतका के परिजनों को न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है।
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