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Shehar Me Shor Hai। BLOs के कंधों पर SIR का बोझ, मौत पर सवाल, आखिर हकीकत क्या?

देश में हर तरफ एसआईआर का शोर है। कहीं सियासी बवाल है तो कहीं कई बड़े सवाल है। राजनीतिक वार-पलटवार तो हो ही रही हैं। लेकिन अब BLOs के मौत को लेकर भी सियासी तनातनी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। एसआईआर की शुरुआत बिहार से हुई थी जहां 77895 BLOs यानी कि बूथ लेवल ऑफिसर लगे थे। बिहार में समय सीमा के भीतर एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि तब राजनीतिक तौर पर इसका जमकर विरोध किया गया। लेकिन बिहार के बाद 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया अभी चल रही है। इन 12 राज्यों में लगभग 51 करोड़ मतदाता है जिन्हें एसआईआर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। एसआईआर की प्रक्रिया को पूरा करने में BLOs की भूमिका बेहद ही अहम है। हालांकि BLOs के आत्महत्या, ब्रेन हेमरेज की भी खबरें आ रही हैं। यह कहीं ना कहीं तकलीफ देह है। दावा किया जा रहा है कि अधिकारियों की तरफ से दबाव की वजह से BLOs आत्महत्या कर रहे हैं या फिर उनके ब्रेन हेमरेज हो रहे है। 
 

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इतना ही नहीं, कई आरोप ऐसे भी आ रहे हैं की BLOs के ऊपर इतना दबाव था कि उसने मजबूरी में अपनी नौकरी छोड़ दी। वर्तमान में देखें तो एसआईआर की प्रक्रिया में शामिल सात राज्यों में 25 BLOs की मौत ने चिंता बढ़ा दी है। BLOs की मौत की खबरें मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के साथ-साथ केरल और तमिलनाडु से भी आई है। सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश में हुई है। हालांकि, चुनाव आयोग या उससे जुड़े अधिकारी लगातार इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं कि BLOs के ऊपर किसी भी तरीके का दबाव है। उनका साफ तौर पर कहना है कि इन मामलों की हम जांच कर रहे हैं। कई जगह अधिकारियों द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि BLOs की मौत उनकी अपनी स्वयं की स्वास्थ्य परेशानियों से हो रही है।
दूसरी ओर इस बात का दावा किया जा रहा है कि एसआईआर के काम में लगे BLOs को टारगेट दिया जा रहा है। अगर BLOs वह टारगेट पूरा करने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं तो उनकी वेतन को रोक दी जा रही है या रोकने की बात कही जा रही है जिससे की BLOs की परेशानी बढ़ जा रही है। कई जगह ऐसी भी खबरें आई है कि गांव में या कहीं भी एसआईआर की प्रक्रिया करने गए BLOs को राजनीतिक कारण से स्थानीय लोगों से सहयोग नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से वे दबाव में आ जा रहे हैं और अपना काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कई जगह BLOs पर हमले की भी खबर आ रही है जिसकी वजह से कई राजनीतिक दल BLOs को लेकर सुरक्षा की मांग भी कर रहे हैं। हालांकि यह बात भी सच है की BLOs के अधिकार की लड़ाई राजनेता कम लड़ रहे हैं। अपनी सियासी रोटी सेंकने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे है। 
बिहार में BLO के तौर पर काम कर चुके एक वरिष्ठ अधिकारी से भी इस पर हमने बातचीत की है। नाम ना बताने की शर्त पर अधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि हां, दबाव होता है। परंतु ऐसा भी दबाव नहीं रहता कि आप आत्महत्या कर ले। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्निकल काम है। तकनीक की मदद से आप अपने काम को सरल बना सकते हैं। यही काम अगर कोई समय पर नहीं कर पता है तो उसके लिए दबाव लगातार बढ़ता जाता है। प्रतिदिन जो आपको काम करना है, उसे अगर आप पूरा नहीं कर पाते हैं तो यह आपकी मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है। हालांकि काम ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता कि आप उसे पूरा न कर पाए। आपकी लापरवाही या ढीले-ढाले रवैये की वजह से आप उस काम को तय समय में पूरा नहीं कर पाते हैं जिसकी वजह से परेशानियां बढ़ती है। ऊपर से दबाव भी बढ़ता है। हम अपने दबाव की बात तो जरूर करते हैं। लेकिन ठीक उसी तरीके का दबाव हमारे ऊपर के अधिकारियों पर भी होता है। ब्लॉक लेवक के अधिकारी पर भी होता है। डीएम पर भी होता है और उसके ऊपर जो लोग भी हैं उन पर होता है। समय पर कार्य पूरा करना और करवाना हम सभी की जिम्मेदारी होती है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को कुछ परेशानी होती है तो कई BLOs एक दूसरे की मदद के लिए सामने भी आते हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में एक बूथ पर एक BLO को जिम्मेदारी दी गई थी जिसकी संख्या लगभग 1200 थी। अब 1000 की संख्या पर एक बूथ बनाया जा रहा है और वहां की जिम्मेदारी एक BLO को दी जा रही है। चुकी एसआईआर की शुरुआत बिहार से हुई थी, इसलिए उन्होंने यह भी बताया कि शुरू में जब आधार कार्ड को मान्यता नहीं दी गई थी, तब परिस्थितियां बिल्कुल अलग थी। मुश्किल थी और एसआईआर के काम में बहुत सारी परेशानियां आ रही थी। लेकिन जैसे ही आधार कार्ड को मान्यता दी गई, यह काम सरल हो गया। उन्होंने इस बात को दोबारा स्वीकार किया कि हां, ऊपर से दबाव रहता है। लेकिन ऐसा दबाव बिल्कुल भी नहीं रहता कि आप कोई गलत कदम उठा ले।
 

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उधर निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार को पत्र लिखकर राज्यभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और अन्य निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह पत्र कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं को अज्ञात लोगों द्वारा धमकाए जाने की घटनाओं के बाद लिखा गया है। तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को यहां निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की और दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, आयोग ने इस आरोप को खारिज कर दिया। 


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