सहरसा के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की 450 छात्राएं जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की इमारत इतनी खराब हो चुकी है कि कक्षाओं के दौरान दीवारों और छत का प्लास्टर गिरना सामान्य बात हो गई है। इससे छात्राओं की पढ़ाई बाधित होती है और उन्हें हर पल हादसे का डर सताता रहता है। विद्यालय की प्राचार्य बेबी देवी ने भवन की स्थिति को ‘अत्यंत खतरनाक’ बताया। उन्होंने कहा कि छत की छड़ें बाहर निकल आई हैं, दीवारों में कई जगह दरारें पड़ गई हैं और कमरों की हालत छात्राओं के बैठने लायक नहीं है। उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर दी गई प्राचार्य ने बताया कि इस गंभीर स्थिति की जानकारी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर दी गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह मध्य स्कूल 1980 में राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक स्कूल से अलग होकर वर्तमान भवन में स्थानांतरित किया गया था। मूल रूप से राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना 1955 में हुई थी। लगभग 20 कमरों वाले इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है और आठ शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। छात्राओं को सता रहा सिर पर प्लास्टर गिरने का डर कक्षा 7 की छात्राओं शिवानी, आराध्या, नंदिनी और शालिनी ने बताया कि उन्हें रोज़ यह डर सताता है कि कहीं उनके सिर पर प्लास्टर न गिर जाए। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले एक छात्रा के सिर पर प्लास्टर गिरने से वह घायल हो गई थी। छात्राओं के अनुसार, सभी कमरे इतने जर्जर हो चुके हैं कि उनमें बैठना भी असुरक्षित महसूस होता है। प्राचार्य बेबी देवी ने दोहराया कि विद्यालय प्रबंधन लगातार समस्या के समाधान की मांग कर रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मरम्मत कार्य शुरू न होने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। स्कूल भवन के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पटना भेजा गया इस संबंध में, जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने बताया कि स्कूल भवन के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पटना भेजा गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंजूरी मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा। छात्राओं और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से जल्द कार्रवाई करने और सुरक्षित भवन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।
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