आगरा नगर निगम में सियासी पारा हाई होता जा रहा है। मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त खंडेलवाल के बीच की रार में अब पार्षद और कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं। पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया था। अब इसके विरोध में नगर निगम के कर्मचारी उतर आए हैं।
मेयर-नगर आयुक्त के बीच चल रही तनातनी के बीच जिस तरह से भाजपा और बसपा के पार्षद जहां मेयर के समर्थन में उतर आए थे। उसी तरह से मंगलवार को नगर निगम के कर्मचारी नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के समर्थन में आ गए। मंगलवार को विरोधस्वरूप उन्होंने काली पट़्टी बांधकर काम किया। चपरासी से लेकर क्लर्क और अधिकारियों ने भी काली पट्टी बांधकर काम किया। उन्होंने सोमवार को नगर निगम सदन में बैठक के दौरान नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव का विरोध किया। अब विस्तार से पढ़िये…
सोमवार को मेयर हेमलता दिवाकर ने नगर निगम के सामान्य सदन की बैठक बुलाई थी। नगर आयुक्त ने लोकसभा की कार्यवाही जारी रहने और शहर में सार्वजनिक उपक्रम समिति के आगमन का हवाला देकर बैठक टालने की मांग की थी। सचिवालय से एजेंडा भी जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद मेयर तय समय पर करीब 11:30 बजे सदन में पहुंच गईं। भाजपा के अधिकांश पार्षदों ने भी सदन कक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। कुछ देर बाद बसपा सहित अन्य विपक्ष के पार्षद भी पहुंच गए। पहले देखिये काली पट्टी बांधकर काम करने वाली 3 तस्वीरें… हैरानी तब हुई जब अधिकारियों की दीर्घा पूरी तरह खाली रही और मेयर के साथ डायस पर बैठने वाले नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मुख्य वित्त नियंत्रक सहित कई अधिकारी गायब थे। डायस पर मेयर अकेली बैठी थीं। कार्यवाही शुरू होते ही पार्षदों ने इस बात की निंदा शुरू कर दी कि मेयर द्वारा सदन बुलाने के बाद भी सभी अधिकारी नदारद हैं।
जब बसपा पार्षद सुहेली कुरैशी ने जवाब मांगा तो मेयर ने कहा-इसके जिम्मेदार नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल हैं, जो समय से सूचना नहीं देते। बैठक का एजेंडा भी जारी नहीं किया गया है। लोकसभा की कार्यवाही और सार्वजनिक उपक्रम समिति के आगमन की सूचना आज सुबह नौ बजे दी गई।
बैठक की कार्रवाई समाप्त होने तक करीब 72 पार्षदों ने निंदा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और नगर आयुक्त तथा नगर निगम के अन्य अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया था। अब कर्मचारी नगर आयुक्त के समर्थन में आए
इधर, मंगलवार को जब कर्मचारियों को निंदा प्रस्ताव की जानकारी हुई तो वे नगर आयुक्त तथा नगर निगम के अन्य अधिकारियों के समर्थन में उतर आए। उन्होंने विरोधस्वरूप काली पट्टी बांधकर काम किया। नगर निगम के चपरासी से लेकर क्लर्क और अधिकारियों ने भी काली पट्टी बांधकर काम किया। अब पढ़िये मेयर का क्या है कहना?
मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह का कहना है-अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। मनमानी कर रहे हैं। जनता के प्रति गंभीर नहीं हैं। मेरी सुनते नहीं हैं। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल सहित अन्य अधिकारी सरकार के विरुद्ध काम कर रहे हैं। इस बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। नगर आयुक्त का क्या है कहना?
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल का कहना है-मेयर कार्यालय से बैठक को लेकर कोई लिखित निर्देश नहीं मिला। 13 मार्च को बजट बैठक कराने का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका। शहर के विकास के लिए 2025-26 का बजट पास होना बेहद जरूरी है। संसद के बजट सत्र के चलते बैठक पर रोक की स्थिति थी। विशेष परिस्थितियों में ही बैठक संभव है। मेयर को पत्र भेजकर निर्देश मांगे गए, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है।

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