औरैया में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के तत्वावधान में तिलक महाविद्यालय में मंगलवार को दो दिवसीय अखिल भारतीय अंतर्विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में भारतीय परंपरा में चिंतन बोध सहित विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा हुई। मुख्य अतिथि डॉ. राजेश द्विवेदी, समन्वयक महाविद्यालय विकास परिषद, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए उनके मूल में जाकर गहन मंथन और उन पर अमल करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि इसी से भारतीय संस्कृति की धरोहर सुरक्षित रह सकती है। डॉ. धीरेंद्र सिंह सेंगर ने अपने शोध पत्र में बताया कि भारतीय चिंतन परंपरा में मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु पारंपरिक सांस्कृतिक आधारों को अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए उन सभी क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा जहां से संस्कृति का संरक्षण संभव हो सके। तिलक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि कुमार ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए सभी को राष्ट्र प्रेम की भावना से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. राधा कुशवाह, डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. पल्लवी सिंह, डॉ. वीणा पांडे, डॉ. विकास दुबे, गौरव अग्रवाल, डॉ. अनुपमा वर्मा, डॉ. सुयश शुक्ला, डॉ. प्रबल प्रताप सिंह तोमर, डॉ. अनीता परिहार, डॉ. देवेंद्र स्वरूप त्रिपाठी, श्रीमती रितु अग्रवाल, डॉ. अनुराग द्विवेदी सहित कई प्रमुख प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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