भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधान परिषद सदस्य और पूर्व जिलाध्यक्ष महेन्द्र यादव का निधन हो गया है। उन्होंने गोरखपुर के राजेन्द्र हॉस्पिटल में देर रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से जिले समेत आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान एक कार्यक्रम से लौटते समय गोरखपुर रोड पर हुई दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद से उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को बरहज के कटैलवा घाट पर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र डॉ अभिषेक यादव ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, जिससे घाट पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और यातायात जाम की स्थिति बन गई। व्यवस्था संभालने में पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। महेन्द्र यादव के अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव मुंडेरा में पार्थिव शरीर रखा गया था। यहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह, बरहज विधायक दीपक मिश्र “शाका”, रामपुर कारखाना विधायक सुरेन्द्र चौरसिया सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उनके निधन पर दलीय सीमाएं भी टूटती नजर आईं, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वह क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के एक बड़े और सर्वमान्य नेता के रूप में जाने जाते थे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह 1982 में पहली बार सदर ब्लॉक प्रमुख चुने गए और बाद में कई बार इस पद पर रहे। 1998 में वह विधान परिषद सदस्य बने और अपने कार्यकाल में विकास के नए आयाम स्थापित किए। महेन्द्र यादव अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन को पार्टी और क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।

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