आगरा में BJP सांसद कंगना रनोट के खिलाफ MP-MLA कोर्ट में सुनवाई होगी। 12 नवंबर को स्पेशल कोर्ट ने जिरह सुनने के बाद आदेश दिया था कि किसानों पर दिए विवादित बयान पर निचली अदालत में सुनवाई होगी। इसके बाद यह पहली सुनवाई हो रही है। आगरा स्पेशल कोर्ट में हिमाचल प्रदेश के मंडी क्षेत्र से BJP सांसद पर किसानों के अपमान एवं राष्ट्रद्रोह का केस पिछले साल से चल रहा है। पिछली सुनवाई पर कंगना की अधिवक्ता कोर्ट पहुंची। दोनों पक्षों ने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद निचली अदालत में सुनवाई का आदेश जारी किया था। 12 नवंबर को कोर्ट में क्या हुआ, ये जानिए
कार्ट में 1.30 घंटे बहस चली, जज ने दलीलें सुनीं
स्पेशल जज एमपी एमएलए लोकेश कुमार की कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस सुनी गई। वादी वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान राजवीर सिंह बी एस फौजदार दुर्गे विजय सिंह भैया सुरेंद्र लाखन उमेश जोशी आदि अधिवक्ताओं ने बहस की। वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान ने अपने तर्क में कहा कि अवर न्यायालय द्वारा उक्त बाद को खारिज किया जाना न्याय संगत नहीं है। क्योंकि अवर न्यायालय ने थाना न्यू आगरा की पुलिस से जो आख्या मांगी थी, वह विपक्षीय की और से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया था। बिना आख्या प्रस्तुत के कोर्ट को अधिकार नहीं है कि उसमें कोई निर्णय पारित कर दे। अधिवक्ता राजवीर सिंह ने कहा कि संविधान के अधिकार और कर्तव्य का विपक्षीया ने उल्लंघन किया है। देश के किसानों का, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं क्रांतिकारी शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। वहीं कंगना रनोट की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुसूया चौधरी, उनकी जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान और अधिवक्ता विवेक शर्मा ने भी अपने तर्क रखे। रिवीजनकर्ता रमाशंकर शर्मा ने कहा कि बठिंडा कोर्ट द्वारा इसी प्रकार के मामले में कंगना रनोट को तलब किया गया है। 24 नवंबर 2025 को कंगना को कोर्ट में हाजिर होने के लिए आदेश हुए हैं। इसके बाद भी अवर न्यायालय ने वाद को खारिज कर दिया। रिवीजन कर्ता राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा ने बहस में कहा कि कंगना ने किसानों के ऊपर हत्यारा बलात्कारी एवं अलगाव वादी होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह खुद एक किसान हैं। किसान के बेटे हैं और वकालत से पूर्व खेती भी की है। उन्होंने बहस के साथ अपने खेत की खतौनी भी कोर्ट में पेश की। कहा कि अवर न्यायालय द्वारा जिन तथ्यों पर वादी के वाद को 6 मई को निरस्त किया गया, वह निराधार है। विपक्षी कंगना की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने भी अपने तथ्यों को रखते हुए बहस की। दोनों पक्षों के बीच में करीब डेढ़ घंटे तक बहस चली। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इसके बाद 12 नवंबर को कोर्ट ने निर्णय दिया कि इस मामले में सुनवाई की जानी चाहिए।
यह है पूरा मामला
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 24 को कंगना रनोट के खिलाफ अदालत में राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाकर वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि सांसद कंगना रनोट ने 26 अगस्त 2024 को दिए बयान में किसानों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। जिससे उनकी और लाखों किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। अधीनस्थ न्यायालय ने खारिज कर दिया था। वादी ने आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में रिवीजन प्रस्तुत किया था।
कहा था- किसान आंदोलन के समय रेप-मर्डर हुए
24 अगस्त 2024 को कंगना ने एक इंटरव्यू के दौरान दैनिक भास्कर से कहा था- किसान आंदोलन के समय रेप-मर्डर हुए। बिल वापसी न होती तो प्लानिंग लंबी थी। इसके बाद उनके खिलाफ आगरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा ने MP/MLA कोर्ट में 11 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। आरोप लगाया कि कंगना ने धरने पर बैठे लाखों किसानों पर अभद्र टिप्पणी की। उन पर राष्ट्रद्रोह का केस लगे।
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