चित्रकूट जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के सभागार में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सेमिनार सोमवार को संपन्न हो गया। इस सेमिनार में ‘शिक्षक शिक्षा में बदलाव’, ‘समावेशी शिक्षा’, ‘शिक्षा में नवाचार’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ और स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। जिले के शिक्षाविदों, डायट मेंटर्स, एसआरजी, एआरपी और शिक्षकों ने भाग लेकर आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अपने विचार साझा किए। सेमिनार का शुभारंभ 23 मार्च 2026 को हुआ। डीएलएड बैच-24 की प्रशिक्षु शिवानी, लक्ष्मी और अनामिका ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जिसके बाद लक्ष्मी और अनामिका ने स्वागत गीत गाया। डायट प्राचार्य बी.के. शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट से शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता डॉ. निहार रंजन मिश्र और सहायक आचार्य डॉ. रजनीश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डायट प्राचार्य बी.के. शर्मा ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया। सेमिनार के पहले दिन ‘शिक्षक शिक्षा में बदलाव’ मुख्य विषय रहा। डॉ. रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षक शिक्षा में बदलाव का अर्थ केवल शिक्षण शैली बदलना नहीं, बल्कि शिक्षक की भूमिका को ‘सूचना देने वाले’ से ‘सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने वाले’ मार्गदर्शक में परिवर्तित करना है। उन्होंने जोर दिया कि नई शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ विचारशील और नवाचारी भी हों। दूसरे दिन समावेशी शिक्षा, नवाचार और स्वास्थ्य देखभाल पर विशेष चर्चा की गई। इसमें दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने, उनके लिए बाधा-मुक्त वातावरण बनाने और यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) तथा संवेदी शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। समापन भाषण में प्राचार्य बी.के. शर्मा ने कहा कि समावेशी शिक्षा केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक मानवीय दृष्टिकोण है। इस सेमिनार में जनपद के 98 शिक्षक, डायट के प्रवक्ता और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम का संयोजन डायट प्रवक्ता मोहित कुमार सिंह ने किया।

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