हाथरस में एक न्यायिक फैसले में न्यायालय ने एक डॉक्टर और सात अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश गलत इलाज के कारण एक मरीज की मौत और उसके बाद जातिसूचक गालियां देने के आरोपों के बाद आया है। गिजरौली निवासी आकाश वर्मा ने प्रार्थनापत्र दायर कर बताया था कि 13 अक्टूबर को वह अपनी मां को पेट दर्द की शिकायत के साथ प्रेम रघु आयुर्वेदिक पैरामेडिकल हॉस्पिटल ले गए थे। वहां डॉ. भुवनेश ने अल्ट्रासाउंड और रक्त जांच कराने को कहा। जांच के बाद रसौली की बात कहकर ऑपरेशन की सलाह दी गई और उसी दिन मां को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। आकाश वर्मा के अनुसार, डॉक्टर के कहने पर अस्पताल में 35 हजार रुपए जमा कराए गए और किसी अन्य डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन किया गया। उसी दिन शाम बजे को ऑपरेशन रूम से प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया गया और बताया गया कि उन्हें छह दिन अस्पताल में रहना होगा। रात्रि करीब 2:00 बजे मां की तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आए और स्टाफ को फोन पर इंजेक्शन आदि लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद मां का स्वास्थ्य और बिगड़ गया। 14 अक्टूबर की सुबह परिजनों ने डॉक्टर से कहा कि यदि इलाज उनके बस में नहीं है, तो किसी दूसरे अस्पताल में रेफर कर दें। यह सुनकर डॉ. भुवनेश और स्टाफ के सदस्य पूजा कुशवाहा, प्रेम सिंह, अभिषेक उर्फ छोटू, हिमांशु, अमित, कामा, अंजू ने 15 हजार रुपए तुरंत जमा कराने को कहा। यह राशि जमा करने के बाद 14 अक्टूबर की शाम को डॉक्टर ने दवाइयों और इंजेक्शन के नाम पर 20 हजार रुपए और जमा कराए। 15 अक्टूबर की सुबह जब आकाश वर्मा अपनी मां का हालचाल जानने गए, तो कमरा अंदर से बंद था। धक्का देने पर कुंडी खुल गई और उन्होंने पाया कि उनकी मां की मृत्यु हो चुकी थी। गलत इलाज की बात कहने पर डॉक्टर और स्टाफ ने कथित तौर पर जातिसूचक गालियां दीं। न्यायालय ने थानाध्यक्ष कोतवाली सदर को संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया है।
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