धर्मांतरण और आरक्षण लाभ से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का मुरादाबाद में दलित समाज ने स्वागत किया है। वाल्मीकि समाज के लोगों ने इसे न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय का आभार जताया। दलित समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोग एक साथ दो तरह के लाभ न लें। उनका मानना है कि अब कोर्ट के फैसले से स्थिति स्पष्ट हो गई है और दोहरे लाभ की व्यवस्था पर रोक लगेगी। वाल्मीकि समाज से जुड़े लल्ला बाबू द्रविड़ ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि करीब 45 साल के संघर्ष के बाद उनकी बात सुनी गई है। उन्होंने इसे न्याय के हित में लिया गया निर्णय बताया। द्रविड़ ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति के लाभ लेते रहे, जिससे असली हकदारों को नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक लाभ के लिए दलित युवतियों से विवाह करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार सख्ती से कार्रवाई की जाए और दोहरे लाभ लेने वालों पर रोक लगाई जाए। लल्ला बाबू द्रविड़ ने बताया कि मुरादाबाद में उनके प्रयासों से वाल्मीकि समाज के कई परिवारों की “घर वापसी” भी कराई गई है। दलित समाज के लोगों ने इस फैसले को अपनी लंबे समय की लड़ाई की जीत बताया। उनका कहना है कि “आज हमारी बात सुनी गई है” और यह उनके लिए खुशी का दिन है।

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