जौनपुर में गन हाउस के संचालक पर अवैध रूप से कारतूसों की खरीद फरोख्त के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। इस मामले का खुलासा एसडीएम और सीओ की जांच हुआ है। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर में कारतूसों की बिक्री की संख्या अधिक दर्ज किया गया। लेकिन लाइसेंस पर कम संख्या दर्ज की गई है। ऐसे में कारतूसों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। गन हाउस के संचालक का कहना है कि वह पिछले 5 साल से दुकान पर कम जाते हैं। दुकान का देखभाल उनका बेटा करता है। तीन लाइसेंसधारकों को बेचा कारतूस यह पूरा मामला केराकत थाना क्षेत्र में स्थित राजपूत गन हाउस का है। संचालक कैलाशनाथ सिंह पर बिना अनुमति 680 कारतूस बेचने का आरोप है। पुलिस ने उनके खिलाफ आयुध अधिनियम 1959 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसडीएम शैलेन्द्र कुमार और सीओ अजीत कुमार रजक की संयुक्त टीम 21 जनवरी को शस्त्र दुकानों की जांच की। जांच में सामने आया कि दुकान से तीन अलग-अलग लाइसेंसधारकों को एक वर्ष के भीतर 200 से अधिक कारतूस नियमों के विपरीत बेचे गए हैं। 100 की अनुमति वाले को बेटा 230 कारतूस जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए। आजमगढ़ के बनगांव निवासी प्रदीप कुमार सिंह को 240 कारतूस बेचे गए, जबकि उनका लाइसेंस पहले ही खो चुका था। वहीं वाराणसी के करौता निवासी ब्रह्मजीत सिंह को 230 कारतूस दिए गए, जबकि उनके लाइसेंस पर सिर्फ 100 कारतूस की अनुमति थी। इसी तरह वाराणसी के भदवां निवासी विजय कुमार सिंह को 210 कारतूस बेचे गए, जबकि उनके लाइसेंस में 165 कारतूस का ही विवरण दर्ज था। खास बात यह रही कि स्टॉक रजिस्टर में बिक्री का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया गया, लेकिन लाइसेंस पर कम संख्या अंकित की गई, जिससे कारतूसों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2), 318(4) और आयुध अधिनियम की धारा 30 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक राजेन्द्र प्रसाद को सौंपी गई है। वहीं, कोतवाल अरविन्द पाण्डेय ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, संचालक कैलाशनाथ सिंह ने कहा कि वह पिछले पांच साल से दुकान पर कम जाते हैं। दुकान का देखभाल उनका बेटा ही करता है।

Leave a Reply