जया प्रदा 22 मार्च को लखनऊ में थीं। सिर्फ 6 घंटे के दरम्यान उन्होंने भाजपा के 2 बड़े चेहरों से मुलाकात की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव से मुलाकात की फोटो शेयर कीं। आखिरी बार मार्च, 2024 में रामपुर में जया प्रदा MP-MLA कोर्ट में पेशी के दौरान दिखी थीं। लंबे अंतराल के बाद वह अचानक सियासी चेहरों के बीच दिखीं तो कयास लगाए जाने लगे कि क्या एक बार फिर यूपी की सियासत में सक्रिय होंगी? जया प्रदा की सक्रियता संगठन में दिखेगी या 2027 के विधानसभा चुनाव में वे बतौर प्रत्याशी नजर आएंगी? पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट… पंकज चौधरी से जया की मुलाकात ने छेड़ी नई चर्चा
जया प्रदा ने अपनी सियासी पारी भले ही दक्षिण के राज्य आंध्रप्रदेश से शुरू की, लेकिन उन्हें राजनीतिक पहचान यूपी के रामपुर से मिली। रामपुर से वह सपा के टिकट पर 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंंचीं। इसके बाद 2010 में जया प्रदा को सपा से बाहर कर दिया गया। तब से उनकी सियासी नैय्या भंवर में फंसी है। राष्ट्रीय लोकमंच और आरएलडी से होते हुए वह भाजपा में पहुंच तो गई हैं। लेकिन 2019 का लोकसभा चुनाव रामपुर से हारने के बाद से हाशिए पर हैं। ऐसे में यूपी विधानसभा 2027 से पहले अचानक लखनऊ आकर जया प्रदा ने सियासी चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, वह लखनऊ में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। इसी कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पहुंचे थे। पार्टी से जुड़े सूत्र कहते हैं- सांसद रहने के दौरान जया प्रदा की पंकज चौधरी से अक्सर मुलाकात होती थी। इसी वजह से कार्यक्रम के बाद जया प्रदा उनके साथ पार्टी कार्यालय पहुंचीं। वहां दोनों के बीच काफी देर बातचीत हुई। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, यह सामने नहीं आया है। लेकिन, पार्टी के लोग इसे सामान्य मुलाकात बता रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र प्रताप राना इसे औपचारिक मुलाकात से ज्यादा मान रहे हैं। वह कहते हैं- जया प्रदा 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से प्रत्याशी रह चुकी हैं। लेकिन, उस हार के बाद से वे पार्टी में कम सक्रिय दिखीं। इस मुलाकात से तय है कि वह वापस सक्रिय होना चाहती हैं। वहीं, पंकज चौधरी ने हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाली है। वह संगठन में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे में जया प्रदा को संगठन में कोई बड़ा रोल दे सकते हैं। दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- क्या रामपुर जिले की किसी सीट से चुनाव लड़ेंगी जया प्रदा
सपा से निकाले जाने के बाद जया प्रदा ने रामपुर की जगह बिजनौर से आरएलडी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था। इससे साफ है, रामपुर में उनका खुद का कोई वोटबैंक नहीं है। भाजपा में शामिल होने पर ही वह दोबारा रामपुर लड़ने गई थीं। रामपुर की सियासत पर बारीक नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार फैज-ए-आम अकबर कहते हैं कि जया प्रदा सफल फिल्मी अभिनेत्री हैं। वह भीड़ जुटाऊ चेहरा तो हैं, लेकिन 2019 में हार के बाद से कभी रामपुर नहीं आईं। हालांकि वो सेलिब्रिटी हैं। जिस तरीके से वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और फिर मुलायम सिंह की छोटी बहू से मिलने पहुंची थीं, उससे साफ है कि वे फिर से सक्रिय होना चाहती हैं। जया बड़ा चेहरा हैं, भाजपा उन्हें कहीं से भी चुनाव लड़ा सकती है। रामपुर जिले की 5 सीटों में दो पर भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (एस) का कब्जा है। तीन पर सपा के विधायक हैं। आजम खान के जेल जाने के बाद से यहां की सियासत ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब कौम के लोगों में आजम के लिए सहानुभूति देखने को मिल रही है। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि जया प्रदा एक और हार के लिए रामपुर में वापस आएंगी। रामपुर सदर सीट से इस बार संकेत मिल रहे हैं कि आजम खान की बहू चुनाव लड़ सकती हैं। ऐसे में यह सीट टफ होगी। स्वार सीट पहले से भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) के पास है। तीन अन्य सीटें मुस्लिम बहुल हैं। वहां से लड़ने के लिए जया प्रदा जाएंगी, इसमें संदेह है। सपा के महिला कार्ड के खिलाफ भाजपा का तुरुप का इक्का बन सकती हैं
वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र राना कहते हैं- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 22 मार्च को अपनी दादी के नाम पर अलग-अलग जाति समूह से आने वाली महिलाओं को पुरस्कार देने की शुरुआत की। साथ में यह भी कहा कि 2027 में अगर यूपी में उनकी सरकार बनती है, तो वे महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपए देंगे। सपा के इस महिला स्कीम पर सबसे बड़ा हमला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बोला था। उन्होंने सपा शासन में महिलाओं की सुरक्षा का बड़ा मुद्दा उठाकर घेरने की कोशिश की। जया प्रदा इस मामले में भाजपा के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकती हैं। सपा में रहने के दौरान आजम खान ने उनके खिलाफ जमकर अपमानजनक शब्द बोले थे। अब भाजपा जया प्रदा को आगे करके सपा के महिला कार्ड का काउंटर कर सकती है। अब बात अपर्णा यादव से मुलाकात की यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव मुलायम सिंह यादव की बहू हैं। भाजपा कार्यालय से निकलने के बाद जया प्रदा रविवार शाम अपर्णा के घर पहुंचीं। अपर्णा ने माथे पर तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। जया प्रदा ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया। उन्हें गले भी लगाया। इससे साफ है कि उनके बीच की बॉन्डिंग बहुत मजबूत है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच एक घंटे तक बातचीत हुई। किन मुद्दों पर बात हुई, यह तो पता नहीं चला है। लेकिन, इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। अपर्णा यादव खुद सपा परिवार से हैं, लेकिन भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। जया प्रदा भी पहले सपा से जुड़ी रही हैं। वे मुलायम सिंह के करीबी नेताओं में शामिल थीं। अब जया भी भाजपा में हैं। अब कहा जा रहा है कि सपा बैकग्राउंड वाली दोनों महिलाओं को एक साथ आगे करके भाजपा अखिलेश यादव को घेरने की रणनीति बना सकती है। जानिए जया प्रदा से जुड़े विवाद ————————– यह खबर भी पढ़ें – मंत्री संजय निषाद महारैली में फूट-फूटकर रोए, बोले- हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही गोरखपुर में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद मंच पर फूट-फूट कर रोए। उन्होंने कहा, हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमें मजबूत होना होगा। इससे पहले संजय निषाद ने रविवार को 2027 विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया। उन्होंने 3000 बाइक के साथ रैली निकाली। खुद मंत्री बुलेट से आगे-आगे चल रहे थे। VIDEO में देखिए संजय निषाद का 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर प्लान क्या है?

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