कानपुर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण शहर के प्रसिद्ध खानपान की दुकानों में मेन्यू में बदलाव कर दिया गया है। कई आइटम दुकानदार बना नहीं रहे हैं। बाकी जो भी दुकान में तैयार किया जा रहा है, वह कोई कोयला भट्टी से तो कोई डीजल भट्ठी के जुगाड़ से काम चला रहा है। मुन्ना समोसा की दुकान से चीज और पनीर समोसा गायब हो गया है, तो मिठाई की दुकानों से रबड़ी और इमरती भी गैस की कमी के कारण गायब हो गई हैं।
अब पढ़िए रिपोर्ट शहर की मशहूर दुकानों में बिकने वाले पकवान क्यों नहीं बन रहे हैं, जो दुकानदारों ने जो बताया
शहर के बिरहाना रोड स्थित मुन्ना समोसा की पहचान उनके समोसों की वैरायटी से जानी जाती है। साल 1973 से समोसे की वैरायटी के रूप में जानी जाने वाली यह दुकान कई प्रकार के समोसे मिलने के लिए मशहूर है। शहर में यहां खासकर आलू के समोसे के अलावा मलाई पनीर, चीज पनीर और पिज्जा समोसे खाने लोग आते हैं।
लेकिन पिछले 15 दिनों से चीज पनीर और मलाई पनीर समोसा खाने वाले मायूस लौट रहे हैं। दुकानदार रामजी गुप्ता ने बताया कि जब से गैस की किल्लत शुरू हुई, तब से दिक्कत बढ़ गई। तीन दिन दुकान बंद रखनी पड़ी। इसके बाद डीजल भट्ठी की व्यवस्था की।
इसके बाद गैस न होने के कारण मेन्यू कम करना पड़ा। हमने चीज पनीर और मलाई पनीर समोसा बनाना बंद कर दिया है। इसके साथ ही खस्ता भी बनाना बंद कर दिया है। कई चीजों के दाम भी बढ़ा दिए हैं।
अब पढ़िए कानपुर की प्रतिष्ठित मिष्ठान की दुकानों के दुकानदारों ने जो बताया
शहर की 125 साल पुरानी बादशाहीनाका, सब्जी मंडी स्थित “भीखाराम महावीर प्रसाद” के नाम से मिठाई की दुकान है। दुकानदार मयंक गुप्ता ने बताया कि हमारे यहां डीजल भट्ठी से काम चल रहा है। सिलेंडर कहीं मिल नहीं रहा है। इसीलिए रबड़ी और इमरती बनाना बंद कर दिया है।इसके अलावा कचौड़ी बनवाना भी बंद कर दिया था, लेकिन ईद पर दो दिन बनवाया, फिर बंद कर देंगे। डीजल भट्ठी के बॉयलर नहीं मिल रहे हैं, इसके लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इसी तरह हालसी रोड स्थित श्याम दूध भंडार, जो करीब 70 साल पुरानी दुकान है। दुकानदार दिनेश ने बताया कि यहां की मिठाई, पनीर, दही स्पेशल है। यहां भी रबड़ी मलाई बनाना बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही खोए की मिठाई में 20 रुपये किलो के हिसाब से दाम बढ़ा दिए गए हैं। उनका कहना है कि पहले तो तीन दिन दुकान बंद इसलिए करनी पड़ी क्योंकि सिलेंडर नहीं मिला। जब विकल्प बनाने के बारे में सोचा, तब डीजल भट्ठी और कोयला भट्टी से काम शुरू किया।

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