सदर नगर पालिका परिषद क्षेत्र के अवेद्यनाथ सभागार में चल रहे अमृतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन, 23 मार्च सोमवार को प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस दौरान पूरा सभागार भक्ति रस में डूब गया और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अयोध्या धाम से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संत गौरव कृष्ण शास्त्री ने अपनी मधुर वाणी से भगवान श्रीराम के बाल्यकाल की लीलाओं का सजीव चित्रण किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम का बाल स्वरूप केवल आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए आदर्शों का भंडार है। शास्त्री जी ने कहा कि श्रीराम के बाल रूप में करुणा, निष्कपटता, सरलता और मर्यादा का अद्वितीय संगम है। यह हर व्यक्ति को जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बचपन से ही अपने आचरण से यह सिद्ध कर दिया था कि महानता उम्र से नहीं, बल्कि संस्कारों, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से तय होती है।
कथावाचक ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि कैसे बालक राम अपने माता-पिता के प्रति आदर, गुरुजनों के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का पालन करते थे। उनके जीवन की प्रत्येक घटना मानव समाज को नैतिकता, संयम और कर्तव्यपालन का संदेश देती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों के ह्रास को देखते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।कथा के दौरान संगीतमय भजनों और मधुर कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजन गूंजते ही श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और “जय श्रीराम” के जयकारों से पूरा सभागार गूंजने लगा। कई श्रद्धालु भक्ति में डूबकर भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पूरा वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भक्त और भगवान के बीच की दूरी समाप्त हो गई हो। सभागार में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी रही। बैठने की जगह कम पड़ गई और कई श्रद्धालु खड़े होकर कथा का आनंद लेते रहे। आयोजन स्थल के बाहर तक श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिलीं, जो इस धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाती हैं। कार्यक्रम में अनुशासन और व्यवस्था भी सराहनीय रही। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल, प्रकाश और ध्वनि की उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिससे सभी श्रद्धालु सहजता से कथा श्रवण कर सके। कथा के समापन पर भव्य आरती का आयोजन किया गया। दीपों की रोशनी, शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच पूरा सभागार दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रभु श्रीराम से अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। समापन के बाद भी श्रद्धालुओं में कथा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लोग समूहों में कथा के प्रसंगों की चर्चा करते नजर आए और अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेते दिखे। यह श्रीराम कथा महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन बनकर सामने आया है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक जागरूकता को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम भी बन रहा है।
आने वाले दिनों में कथा के अन्य प्रसंगों को सुनने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह आयोजन जनमानस में गहरी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में संरक्षक संतोष श्रीवास्तव, अध्यक्ष शिवदत्त अग्रहरि, महामंत्री नीरज श्रीवास्तव, आयोजक शुभम श्रीवास्तव, सह संयोजक व सभासद संदीप जायसवाल, राघवेंद्र यादव, रमेश गुप्त, अजय कसौंधन, अनिल सिंह, रजनीश उपाध्याय, पप्पू चौबे, सुनील त्रिपाठी, राकेश त्रिपाठी, नवीन श्रीवास्तव, अनिल वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, डॉ. अभय शुक्ला, श्रीश श्रीवास्तव, पंकज पासवान, देव अग्रहरि, डॉ. सीमा मिश्रा, आशा उपाध्याय, श्रीमती सोनू कसौंधन, साधना श्रीवास्तव, सुधा त्रिपाठी, सीमा श्रीवास्तव सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी और समर्पण सराहनीय रहा।

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