‘मैं अपनी दोस्त के साथ क्लास जा रही थी। तभी पटाखा चलने जैसी तेज आवाज आई। मैं पीछे घूमी तो देखा कि सूर्या भइया जमीन में गिरे हुए हैं। मैं उधर बढ़ी तो देखा मंजीत के हाथ में पिस्टल है। जिसे लोड कर रहा था। मैं पहुंची तो वह भाग गया। मैं सूर्या की तरफ आगे बढ़ी तो मंजीत दोबारा लौटा। फिर उसने तीन गोलियां और मारीं। हमने पूरी कोशिश की भैया को बचाने की। लेकिन मैं अकेली थी।’ ये कहना है वाराणसी के उदय प्रताप स्वायत्तशासी डिग्री कालेज की स्टूडेंट शिवांगी सिंह का। 20 मार्च को मंजीत जब सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर रहा था, तब शिवांगी सामने खड़ीं थीं और उसे रोक रही थी। मगर मंजीत नहीं माना। सोमवार को सूर्य प्रताप सिंह उर्फ सूर्या को श्रद्धाजंलि देने के लिए स्टूडेंट्स ने कैंडल मार्च निकाला। इसका नेतृत्व शिवांगी ने किया। घटना के समय वह कहां थीं? वह सामने खड़े होकर क्या कह रहीं थीं? सूर्या को गोली मारने के बाद मंजीत कैसे भागा? कॉलेज प्रबंधन के लोग कहां थे? उन्होंने मदद की या नहीं? उन्होंने घटना के बारे में क्या-क्या बताया? पढ़िए रिपोर्ट… मंजीत ने धमकी दी, कहा- यहां से भागो वरना गोली मार दूंगा सोमवार को शिवांगी ने दैनिक भास्कर से बात की। उन्होंने बताया कि 20 मार्च को मैं रोज की तरह क्लास में थी। उसके बाद लाइब्रेरी गई। तभी मेरी एक दोस्त आ गई तो लाइब्रेरी में ही बैग छोड़कर मैं क्लास की तरफ सीढ़ियां चढ़कर जा रही थी। सूर्य भैया सीढ़ी के पास खड़े थे। मैं आगे बढ़ी थी कि एक तेज आवाज आई। मैं पीछे घूमी तो देखा कि सूर्या भइया नीचे फर्श पर पड़े थे। उनके सीने से खून निकल रहा था। वह दर्द से तड़प रहे थे। गोली मारने के बाद आरोपी मंजीत वहां से भाग गया। मैं दौड़कर सूर्या के पास पहुंची। तभी फिर से वहां मंजीत आ गया। उसने मुझसे कहा कि यहां से भाग जाओ, उसे बचाओगी तो मैं तुम्हें भी गोली मार दूंगा। मैं डर गई और पीछे आकर खड़ी हो गई। मेरे सामने ही सूर्या के ऊपर खड़े होकर मंजीत ने 3 गोलियां और मारीं।
सूर्या के दोस्त पहुंचे तब मंजीत छत से कूदकर भागा जब सूर्या भाइया की जान चली गई। गोलियों की आवाज सुनकर सूर्या के दोस्त भी वहां आग गए। उन्होंने आरोपी मंजीत को दौड़ा लिया। आरोपी पहली मंजिल की छत से कूदकर भाग गया। मैं बार-बार मंजीत को रोक रही थी। मैं उससे कह रही थी कि मत मारो उसे। मर जाएगा। मगर वह नहीं माना। अगर वह गोलियां नहीं मारता तो मैं एंबुलेंस से सूर्या को अस्पताल लेकर जाती। तब शायद वह बच जाता है। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि कैसे मैं सूर्या को बचा लूं। शिवांगी ने कहा अगर हम डरेंगे तो कल हमारे लिए भी कोई डरेगा। कोई साथ खड़ा नहीं होगा। हम अगर सूर्या के लिए आवाज नहीं उठाएंगे तो कौन उठाएगा। कल को मेरे लिए भी कोई आवाज उठाने वाला नहीं है। तो इसीलिए मैं आगे गई।
कोई प्रोफेसर नहीं आया, प्रिंसिपल ने नहीं दी अपनी कार शिवांगी ने बताया कि मंजीत के भागने के बाद कोई प्रोफेसर सूर्या को बचाने के लिए नहीं आया। सिर्फ पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर आगे आए। वह चिल्लाते रहे कि इसे कोई अस्पताल लेकर चलो। मगर कोई आगे नहीं आया। जब छात्रों ने घायल सूर्या को अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रिंसिपल से कार मांगी तो उन्होंने मना कर दिया। शिवांगी ने कहा कि मंजीत कॉलेज में पिस्टल लेकर कैसे आया? मैं यह समझ ही नहीं पा रही। यह कालेज प्रशासन की गलती है।
अब जानिए पूरा मामला… 20 दिन बाद शुक्रवार को कॉलेज पहुंचा था छात्र छात्र सूर्य प्रताप सिंह 20 दिन बाद 20 मार्च को कॉलेज पहुंचे थे। सुबह करीब 11 बजे कॉलेज में बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की बीए सेकेंड ईयर के छात्र मंजीत सिंह चौहान ने प्रिसिंपल और छात्रों के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी पिस्टल कूड़े के ढेर में फेंककर फरार हो गया। इस घटना का एक छात्र ने लाइव वारदात का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। हत्या के बाद मंजीत को लगा कि गेट से भागने पर उसे पकड़ लिया जाएगा, इससे बचने के लिए वह छत से कूद गया। करीब 12 फिट ऊंचाई से कूदने पर उसका एक पैर टूट गया। उसकी बाइक गेट पर खड़ी थी, लेकिन खुद को घिरता देखकर वह टूटे पैर से ही आगे एयरपोर्ट रोड की ओर भागा। एक ई-रिक्शा से लिफ्ट लेकर गिलट बाजार चौराहे पहुंचा और फिर फोन बंद कर लिया। इसके बाद सूनसान जगह पर पहुंचकर इलाज कराने का प्रयास किया। पैर टूटने के बाद वह शहर के बाहर भाग नहीं सका। वारदात के बाद गुस्साए छात्रों ने कॉलेज परिसर में हंगामा कर दिया। कैंपस के अंदर कुर्सियां तोड़ दीं थीं। करीब 4 घंटे बाद पुलिस ने कॉलेज का गेट खुलवाया। घेरा बनाकर कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों को बाहर निकाला गया था। छात्रों के पथराव में तीन प्रोफेसर घायल हो गए थे। पुलिस ने लाठी फटकार कर प्रदर्शनकारी छात्रों को भगाया। इधर, मां-पिता अपने इकलौते बेटे की लाश देखकर बेहोश हो गए थे। 20 मार्च को मंजीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 21 मार्च को उसे कोर्ट में पेश किया। पुलिसकर्मी उसे टांगकर कोर्ट रूम में ले गए। मंजीत को सीजेएम ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। हालांकि, मंजीत का साथ देने वाला उसका साथी अनुज सिंह अभी फरार है। अब सूर्य प्रताप सिंह के बारे में जानिए 21 साल का सूर्य प्रताप सिंह गाजीपुर जिले का रहने वाला था। 8वीं तक पढ़ाई उसने गाजीपुर से ही की। यूपी कॉलेज में वह 9वीं से पढ़ने आया था। तब से वह यहीं पढ़ाई कर रहा था। सूर्य प्रताप सिंह पढ़ने में बहुत होनहार था। यूपी कॉलेज से ही PCM से 12वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की थी। फिर यहीं BSC मैथ में एंट्रेंस परीक्षा पास कर एडमिशन लिया। साथी छात्रों ने बताया, सूर्य प्रताप सिंह बेहद मिलनसार था। वह खुद को पढ़ाई में व्यस्त रखता था। BSC के बाद वह यहीं से MSC मैथ्स से रिसर्च करना चाहता था। एकेडमिक में जाने का उसका सपना था। छात्र सूर्य प्रताप सिंह के पिता ऋषि देव सिंह लखनऊ में ट्रैवल एजेंसी के ड्राइवर हैं। उसकी मां किरण सिंह एक स्कूल में सहायिका के रूप में कार्यरत हैं। छात्र की दो बहनें हैं, एक की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी अविवाहित है। सूर्य प्रताप को 20 दिन पहले चेचक निकल आई थी, जिसके चलते वह कॉलेज नहीं आ रहा था। ठीक होने के बाद वह आज ही कॉलेज पहुंचा था। आरोपी मंजीत चौहान पर दर्ज है केस आरोपी छात्र मंजीत चौहान BA सेकेंड ईयर का छात्र है। मंजीत वाराणसी के ही चांदमारी का रहने वाला है। उस पर पहले भी शिवपुर थाने में 323 का मुकदमा दर्ज था, जबकि उसके साथी अनुज पर भी कई मुकदमे दर्ज हैं। बात-बात में मारपीट करने वाला मंजीत चौहान मनबढ़ प्रवृत्ति का है। सोशल मीडिया पर उसकी बैड बॉय की इमेज है। इंस्टाग्राम पर खुद को माफिया बताता है। मंजीत चौहान भोजूबीर, शिवपुर और बड़ा लालपुर जैसे लोकल थानों में भी चर्चित है। सोशल मीडियां पर 1818 गैंग चलाता है। उसने इंस्टाग्राम के बॉयो में लिखा है- आपका सम्मान तभी तक है, जब तक मेरे स्वाभिमान को ठेस न पहुंचे। जय मां भवानी।
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BSC छात्र के हत्यारोपी को टांगकर कोर्ट ले गई पुलिस:काशी में दौड़ाया तो लड़खड़ाकर गिरा; एडीएम से भिड़े स्टूडेंट वाराणसी के यूपी कॉलेज में छात्र के हत्यारोपी को शनिवार शाम कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान पुलिस को आशंका थी कि वकील और छात्र मंजीत की पिटाई कर सकते हैं। इसलिए पुलिस ने मंजीत को दौड़ाने की कोशिश की, लेकिन पैर टूटा होने की वजह से वह लड़खड़ा गया। इस पर पुलिसकर्मी उसे टांगकर कोर्ट रूम में ले गए। मंजीत को सीजेएम ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। पुलिस ने छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या करने वाले मंजीत को शुक्रवार को गिरफ्तार किया था। हालांकि, मंजीत का साथ देने वाला उसका साथी अनुज सिंह अभी फरार है। पढ़ें पूरी खबर

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