हरदोई में दहेज हत्या के एक मामले में पुख्ता सबूतों के अभाव में मृतका के पति सहित तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट संख्या 4 के अपर जिला जज यशपाल ने संदेह का लाभ देते हुए यह फैसला सुनाया। मामले में पुलिस की लापरवाही मानते हुए तत्कालीन सीओ संडीला अरुण कुमार सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। यह मामला 25 सितंबर 2017 को कासिमपुर निवासी उमाशंकर द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा है। उमाशंकर ने बताया था कि उनकी बहन जिया देवी की शादी वर्ष 2012 में कुटी मजरा जमसारा निवासी राजू से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज में बाइक, भैंस और नगदी की मांग को लेकर जिया को प्रताड़ित करने लगे थे। मांग पूरी न होने पर जिया को पीटकर मायके भेज दिया गया था। दो साल बाद नगदी और कुछ सामान देकर बहन को दोबारा ससुराल भेजा गया, लेकिन ससुराल वालों ने उसका उत्पीड़न जारी रखा। 25 सितंबर 2017 की सुबह ससुराल वालों ने जिया को फिर पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। मायके वाले जब घर पहुंचे तो शव पर चोटों के निशान थे। पुलिस ने आरोपी पति राजू, सास आशा देवी और ससुर जगदीश के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह और 14 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए, जबकि आरोपी पक्ष ने तीन गवाह पेश किए। अपर जिला जज ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे सिद्ध करना होता है, और साक्ष्यों में उत्पन्न संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाता है। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। सुनवाई के दौरान मृतका के बहनोई सुरेंद्र ने बताया कि पुलिस ने घटना वाले दिन ही राजू को गिरफ्तार कर लिया था और उसे थाने में बैठा रखा था। हालांकि, पुलिस गवाह उपनिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने गिरफ्तारी 28 सितंबर 2017 को दिखाई। अदालत ने इसे गंभीर विरोधाभास मानते हुए गिरफ्तारी को संदिग्ध माना, जो तत्कालीन विवेचना अधिकारी की लापरवाही को दर्शाता है।

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