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घरों में खाना खिलाने वाली महिलाओं के बच्चे भूखे:कानपुर में महिला रोने लगी, लोग बोले- अब एक टाइम जल रहे चूल्हे

कानपुर में गैस पैनिक के बीच अब सिलेंडर की किल्लत बढ़ती जा रही है। राजापुरवा में रहने वाली यहां की करीब 70% महिलाएं घरों में बर्तन धुलने, खाना बनाने और साफ-सफाई का काम करती हैं। इन लोगों का कहना है कि हम लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इससे हमारे बच्चे पूरे दिन भूखे रहते हैं। लोगों के घर में अब एक टाइम चूल्हा जल पा रहा है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि शहर में पर्याप्त मात्रा में गैस का वितरण किया जा रहा है। जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक है। आखिर लोगों के घर में खाना बना कर खिलाने वाली महिलाओं की दिनचर्या क्या है, कैमरे पर महिलाएं रोनी लगीं। ये समझने के लिए दैनिक भास्कर ने बात की। देखिए गैस किल्लत से परेशान लोगों की 3 तस्वीरें… लोग बोले- हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे
राजापुरवा की रहने वाली मंजू साहू ने बताया- हमारे घर में सिलेंडर नहीं है। हम बहुत परेशान हैं। छोटे-छोटे बच्चे भूखे दिन गुजार रहे हैं। हम लोग सिलेंडर लेने के लिए जाते हैं, तो भगा दिया जाता है। एजेंसी वाले कहते है- पहले KYC करवाओ। अगर KYC नहीं होगी तो बताओ क्या हमारे बच्चे भूखे रहेंगे। इन छोटे- छोटे बच्चों को कहां ले जाएं। हम लोगों का रोज का कमाना- खाना है। कभी काम मिला, कभी नहीं मिला। हम लोग अब चूल्हे पर खाना बनाते हैं। अगर हम खाना नहीं खाएंगे तो दवा कैसे खाएंगे। हमारी मांग है कि केवल मुझे सिलेंडर मिल जाए। हम लोगों को होली से सिलेंडर नहीं मिल रहे
राधा बताती हैं- हम लोग धूप में परेशान हो रहे हैं। पहले घरों में जाकर चूल्हा, बर्तन करो। उसके बाद घर में आकर चूल्हे पर खाना बनाओ। क्योंकि हम लोगों को सिलेंडर मिल नहीं रहा है। एजेंसी वाले कहते हैं कि अभी गाड़ी नहीं आई है। हम लोग भोर में 3 बजे से लाइन में लग जाते हैं, आज ड्यूटी नहीं गए, तब तो तबीयत खराब हो गई है। हम लोगों को तो होली से सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। अब हम लोग पहले लकड़ी बीन के लाते हैं, फिर चूल्हे पर खाना बनाते हैं। हम लोगों के यहां बंगले में काम करते हैं, अगर काम नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या। राधा ने कहा- हमारी कोई नौकरी तो है नहीं। बच्चे लेबर का काम करते हैं, अगर वो लोग लाइन में लगेंगे, तो हम खाएंगे क्या। बड़े बड़े लोग ब्लैक में सिलेंडर लेकर चले जाते हैं। जिनका पावर सोर्स है, उन लोगों को सिलेंडर मिल जाता है। हम लोग बैठे- बैठे मुंह ताकते रहते हैं। एजेंसी पर गए थे, उन लोगों ने सुबह 3 बजे से लाइन लगाने के लिए कहा था। हमारे छोटे- छोटे बच्चे तक लाइन में खड़े रहे। फिर 12 बजे हम लोग वापस आ गए। हम लोगों को पैसे नहीं, सिलेंडर चाहिए। पूनम बोलीं- एक महीने पहले बुक किया, सिलेंडर नहीं मिला लोगों के घरों में काम करने वाली पूनम बताती हैं, हमको सिलेंडर बुक किए हुए एक महीने हो गए है। लेकिन न मैसेज आया, न सिलेंडर आया। हम लोग एजेंसी जाते हैं, तो कहते हैं मैसेज दिखाओ। जब आया ही नहीं तो क्या दिखाए। हम लोग काम करने वाले हैं, अभी मांग के काम चलाते हैं। काम पर भूखे तो जाएंगे नहीं, जब काम करना है, तो कुछ तो खाना पड़ेगा। घरों में साफ-सफाई और बर्तन साफ करते हैं। मेरे पति पैर से लंगड़ा हैं, वो तो कुछ कमा ही नहीं सकते हैं। वो तो कहीं काम करने भी नहीं जा सकते। एक लड़की पागल है, वो भी घर में पड़ी रहती है। हमारे घर में कोई कमाने वाला नहीं है, हमको ही सब कुछ करना पड़ता है। हमारे बच्चे भूखे रहते है जय पांडे कहते हैं- हमारे मोहल्ले में सिलेंडर की व्यवस्था न हो पाने के कारण लोग चूल्हे पर खाना बनाते हैं। अब तो दिन में एक बार खाना बनाने के लिए चूल्हा जलता है। इनके छोटे बच्चे हैं, ये लोग पेंटिंग का काम करते है। ये लोग POP और पुट्टी काम करते है। ये लोग दिन में जाते है, शाम को आते है, तब घर में चूल्हा जलता है। 2 से 5 साल के बच्चे अगर भूखे रहते हैं, तो इनकी तबीयत खराब हो जाएगी। माता जी चूल्हा में खाना बनाती है, लेकिन पैर से दिव्यांग हैं। इनके साथ काफी दिनों से परेशानी हैं। यहां पर दो से तीन ऐसे घर है, जहां बहुत परेशानी है। ये लोग सुबह से शाम तक लाइन लगाये रहते है। हमारे यहां अधिकतर घरों में एक टाइम ही चूल्हा जलता है। हमारे यहां सुबह4 बजे से लोग लाइन लगाते है। इस लाइन मे करीब 800 लोग लगे होते है। यहां पर अधिकतर लोग लेबर और घरों में चूल्हा और बर्तन साफ करते है। अगर एक महिला सुबह घर से निकलती है, फिर शाम को घर आती है, उसके बाद खाना बनाती है, तब बच्चे खाना खाते है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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