लखनऊ में ‘एक बच्चे की डायरी’ नाटक का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया। यह नाटक बच्चे के मन की भावनाओं और उसके अकेलेपन को बेहद संवेदनशील तरीके से दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में लखनऊ लिट्रेरी क्लब की ओर से संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सहयोग से इसका मंचन और उपन्यास का विमोचन भी किया गया। नाटक का निर्देशन ज्ञानेश्वर मिश्र ‘ज्ञानी’ ने किया। नाटक की कहानी समीर नामक एक संवेदनशील बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके माता-पिता की व्यस्त जीवनशैली और आधुनिक सोच के दबाव के कारण समीर खुद को अकेला महसूस करता है। उसकी मां, राज, अपने बेटे को ‘हाई-फाई’ समाज के अनुरूप ढालने का प्रयास करती हैं, लेकिन समीर को यह जीवनशैली पसंद नहीं आती। यह डायरी उसके मन की भावनाओं को सामने लाती है अपने अकेलेपन से जूझते हुए, समीर को एक दोस्त डायरी लिखने की सलाह देता है। यह डायरी ही उसके मन की सच्ची भावनाओं को सामने लाती है। जब यह डायरी उसकी माँ तक पहुँचती है, तो उन्हें पहली बार अपने बेटे के दर्द का एहसास होता है। कहानी यह भी दर्शाती है कि माता-पिता अपने बीते हुए संघर्षों की छाया बच्चों पर नहीं पड़ने देना चाहते, लेकिन अनजाने में उन पर वही दबाव बना देते हैं। मां के व्यवहार से आहत होकर समीर आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाने की कोशिश करता है। हालाँकि, समय रहते माँ को अपनी गलती का एहसास होता है और वह अपने व्यवहार में बदलाव लाती है। परिवार में दादा-दादी को बुलाकर वह रिश्तों की गर्माहट वापस लाती है, जिससे समीर का खोया हुआ बचपन लौट आता है और उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान आ जाती है। मंचन में दिखाया गया कि तीन पीढ़ियों के संस्कार यह नाटक एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि बच्चों को अपनेपन की आवश्यकता होती है। इसमें दिखाया गया कि तीन पीढ़ियों के संस्कार और अनुभव मिलकर ही एक बच्चे के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।मंच पर आदित्य शाक्य, लता बाजपेई,अनिल कुमार,अंशिका सक्सेना,प्रियंका भारती, ज्ञानेश्वर मिश्र ज्ञानी,कंचन शर्मा,निरुपमा राहुल,आरव, दिया भारती, आयुष शर्मा और राज नंदिनी वर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

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