कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बताकर अभिभावकों को झांसे में लेते थे और उनसे मोटी रकम ऐंठ लेते थे। प्रिंसिपल बनकर किया झांसा, किश्तों में ऐंठे लाखों रुपये पुलिस के मुताबिक, 27 फरवरी को कल्याणपुर निवासी सुनील कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि डॉ. आर.बी. गुप्ता नाम बताने वाला एक व्यक्ति खुद को बिहार के कटिहार मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बताकर उनकी बेटी का एमबीबीएस में दाखिला कराने का भरोसा दे रहा था। आरोपी ने सीट अलॉटमेंट के नाम पर पहले 4 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। इसमें 25 हजार रुपये कथित कॉलेज के खाते में और 3.75 लाख रुपये एक ट्रस्ट के खाते में जमा कराए गए। इसके बाद पीड़ित को पटना बुलाकर एडमिशन लेटर देने का भरोसा दिया गया। पटना बुलाकर फिर मांगे पैसे, तब हुआ शक जब पीड़ित पटना पहुंचा तो आरोपी ने और रुपये की मांग कर दी। इस पर सुनील कुमार ने रिश्तेदारों से उधार लेकर 1.75 लाख रुपये और ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद जब कोई एडमिशन लेटर या दस्तावेज नहीं मिला, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कॉल डिटेल और बैंक ट्रेल से खुला राज मामले की जांच में पुलिस ने मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। जांच के दौरान पश्चिम बंगाल निवासी जयंत सरकार (26) और सौरव आइंच (22) की पहचान हुई। इसके बाद पुलिस टीम ने सिलीगुड़ी पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने फर्जी नाम और पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करने की बात स्वीकार की है। गिरोह के अन्य सदस्य भी रडार पर पुलिस पूछताछ में इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। ऐसे करते थे ठगी का खेल कल्याणपुर थाना प्रभारी एवं आईपीएस सुमेध मिलिंद जाधव ने बताया कि आरोपी मोबाइल के जरिए लोगों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में एडमिशन दिलाने का झांसा देते थे। भरोसा जीतने के लिए थोड़ी रकम संस्थान के खाते में जमा कराते थे, जबकि बाकी पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

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