बस्ती जिला उपभोक्ता आयोग ने सड़क परिवहन मंत्रालय और एक टोल प्लाजा को मनमानी वसूली तथा सेवाओं में लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने एक परिवादी को 2 लाख 45 हजार रुपये का मुआवजा और अतिरिक्त वसूले गए 100 रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है। यह मामला कप्तानगंज थाना क्षेत्र के ऐंठी गांव निवासी अधिवक्ता विजय कुमार त्रिपाठी से संबंधित है। उन्होंने अधिवक्ता अरविंद चौधरी के माध्यम से चौकड़ी टोल प्लाजा सहित सात पक्षों के खिलाफ परिवाद दायर किया था। त्रिपाठी के अनुसार, 4 नवंबर 2024 को वे अपनी बेटी के शैक्षिक कार्य से अयोध्या जा रहे थे। हरैया स्थित टोल प्लाजा पर उन्होंने आधार कार्ड दिखाकर स्थानीय निवासी के तौर पर छूट मांगी, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद, जब उन्होंने फास्टैग से भुगतान करने का प्रयास किया, तो कर्मचारियों ने उनके फास्टैग को खराब बताकर दोगुना शुल्क देने का दबाव बनाया और कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। मजबूरन, त्रिपाठी को 200 रुपये नकद भुगतान करना पड़ा। हालांकि, वापसी में उसी टोल प्लाजा पर उनके फास्टैग से 100 रुपये कट गए, जिससे यह साबित हुआ कि फास्टैग सही था और खाते में पर्याप्त धनराशि भी उपलब्ध थी। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि परिवादी को जानबूझकर परेशान किया गया और उन्हें स्थानीय छूट का लाभ भी अनुचित तरीके से नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त, टोल प्लाजा के क्षेत्र में गड्ढायुक्त सड़कों को लेकर भी लापरवाही सामने आई। आयोग ने सभी प्रतिवादियों को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 45 दिन के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है, अन्यथा 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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