उत्तर प्रदेश में 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित है। एचआईवी संक्रमण गर्भवती महिलाओं से बच्चों में न फैले, इसके लिए 72 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। अब तक इसमें से 62 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है। एचआईवी से अधिक भयावह इसे लेकर लोगों की भ्रांतिया है। सोमवार को लखनऊ के राज्य सूचना विभाग के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में बताया गया यदि संक्रमित गर्भवती महिलाएं इलाज कराएं तो वे अपने बच्चों को इस संक्रमण से बचा सकती हैं। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने एचआईवी/एड्स से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और मीडिया की भूमिका को मजबूत बनाने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया। मीडिया से अपील की गई कि वे इस सामाजिक कलंक को कम करने के लिए लोगों को जांच–उपचार के लिए प्रेरित करें। इलाज से संक्रमित गर्भवती महिलाएं स्वस्थ बच्चे को दे सकती हैं जन्म इस अवसर पर संयुक्त निदेशक रमेश श्रीवास्तव और संयुक्त निदेशक डॉ. संजय सोलंकी ने कहा, “एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने में मीडिया की भूमिका बहुत अहम है। वर्तमान में लगभग 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित प्रदेश के विभिन्न एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) केंद्रों पर निःशुल्क परामर्श, दवा और उपचार ले रहे हैं। डॉ. संजय सोलंकी ने बताया कि समय पर उपचार से एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है। इसलिए सभी गर्भवती महिलाओं की शुरुआती जांच बहुत जरूरी है। प्रदेश में 72 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य है। अब तक 62 लाख की जांच हो चुकी है। देश और प्रदेश के आंकड़े प्रदेश में उपलब्ध सेवाएं राष्ट्रीय लक्ष्य और कानूनी प्रावधान कार्यशाला में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के तहत 2030 तक एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों में 80% कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के तहत संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा, गोपनीयता और भेदभाव रोकने के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने मीडिया से अपील की कि एचआईवी/एड्स से जुड़े समाचारों में सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए, ताकि भेदभाव कम हो और लोग बिना झिझक जांच-उपचार की ओर बढ़ें।

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