सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत सेमरियाव में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। नौगढ़ निवासी अंकित सिंह ने 23 मार्च, सोमवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को शिकायत पत्र देकर स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन और आरसीसी बेंच की खरीद में लाखों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अंकित सिंह की शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत सेमरियाव में दिसंबर 2025 में 150 स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए कुल 5 लाख 80 हजार 650 रुपये का भुगतान किया गया। इसमें प्रति स्ट्रीट लाइट की लागत 3871 रुपये दर्शाई गई है। हालांकि, शिकायतकर्ता का दावा है कि बाजार में ओरिएंट कंपनी की सेंसर स्ट्रीट लाइट की कीमत लगभग 1000 से 1200 रुपये के बीच है, और इसके साथ लगने वाला एंगल करीब 120 रुपये का आता है। इस प्रकार, एक स्ट्रीट लाइट की वास्तविक लागत लगभग 1300 रुपये होती है, लेकिन इसका भुगतान लगभग तीन गुना अधिक कीमत पर किया गया।
इसी तरह, सितंबर 2025 में ग्राम पंचायत में 50 डस्टबिन लगाने के नाम पर 2 लाख 39 हजार 950 रुपये खर्च दिखाए गए। प्रति डस्टबिन के लिए 4799 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि बाजार में सामान्य डस्टबिन की कीमत 1000 से 1200 रुपये के बीच बताई जा रही है। आरोप है कि कम कीमत की सामग्री लगाकर कागजों में अधिक खर्च दिखाया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त, मई 2025 में 25 आरसीसी बेंच के लिए 2 लाख 32 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया। इसमें प्रति बेंच की लागत 9300 रुपये दर्शाई गई, जबकि बाजार में सीमेंटेड बेंच की कीमत लगभग 3000 से 3500 रुपये के बीच होती है। अंकित सिंह का कहना है कि इस कार्य में भी भारी अनियमितता बरती गई है और लागत को कई गुना बढ़ाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
शिकायतकर्ता अंकित सिंह ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने और अनियमितताओं में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। अंकित सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत अध्यक्ष तथा विकासखंड स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाला किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल यही कार्य नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में कराए गए अन्य विकास कार्यों जैसे नाली निर्माण और नाली मरम्मत में भी गड़बड़ी की आशंका है, जिसकी जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि उन्होंने 23 मार्च, सोमवार को इस संबंध में जिलाधिकारी को औपचारिक शिकायत दी है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि भुगतान से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच के साथ मौके पर सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इस संबंध में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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