मऊ जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में भारत मुक्ति मोर्चा के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दीपक सिंह के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र जाति आधारित जनगणना, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातिगत गणना का मुद्दा रहा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस विषय पर ओबीसी वर्ग के साथ धोखाधड़ी की जा रही है।
इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी वर्ग के अधिकारों के समर्थन में एक सख्त विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) बिल लागू करने की मांग भी उठाई।
एक अन्य प्रमुख मांग वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की थी। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि ये सभी मांगें संविधान द्वारा प्रदत्त उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत हैं। यह प्रदर्शन भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तले एक राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में बहुजन मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

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