आजमगढ़ जिले के नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर ने समाजवादी पार्टी के PDA के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी PDA की बात तो करती है पर PDA के लोगों के साथ इंसाफ नहीं करती हैं। PDA का जो नारा है। समाजवादी समाज के सभी लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ नारा कहा जा सकता है। 1992 से आज तक पिछले लोगों ने लाइन लगाकर समाजवादी पार्टी को देने का काम किया है। पर पिछले लोगों की आवाज को ठेकेदार टाइप के लोग उनकी सहभागिता और उनके उत्थान में अड़चन डालने का काम कर रहे हैं। बात को इधर-उधर घूमा रहे हैं। मैं समझता हूं कि यह बात ठीक नहीं है। शीर्ष नेतृत्व से मेरा निवेदन है कि जो नारा दिया है उसके अनुसार जमीनी हकीकत जानकर समाज में किसकी कितनी हिस्सेदारी और किसकी कितनी भागीदारी है। यह सोच समझकर फैसला लेने की जरूरत है। शीर्ष नेतृत्व को भड़काने का काम ठेकेदार लोग करते हैं। ग्राउंड रिपोर्ट की आधार पर शीर्ष नेतृत्व जाने हकीकत
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए नगर पालिका के अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर का कहना है कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ठेकेदारों की सलाह पर काम नहीं करना चाहिए। बल्कि लोकल स्तर पर जमीनी स्तर पर सच्चाई जानकर फैसले लेने चाहिए। जिससे कि PDA के नारे के साथ इंसाफ हो सके। राष्ट्रीय नेतृत्व को मुस्लिम समाज का सर्वे कर लेना चाहिए कि फॉरवर्ड कितने हैं बैकवर्ड कितने हैं। मैं समझता हूं यह बात तभी पूरी तरह से न्यायपूर्ण होगी। नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि पासमांदा समाज पूरे पूर्वांचल में 70% पिछड़े मुसलमान है। इतनी बड़ी सहभागिता के बाद भी एक भी नेता को टिकट नहीं दिया गया। ऐसे में इस बिंदु पर सूचना चाहिए। ईमान कुरान से एक संविधान से पिछड़े
नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर का कहना है कि हम ईमान और कुरान से एक है पर संविधान से हम पिछड़े हुए हैं पिछड़ों की जो सहभागिता है उसके हिसाब से राष्ट्रीय नेतृत्व को सोचना चाहिए। मैं समझता हूं तब सबसे ज्यादा सर्वे तार्किक होगा। जब संविधान के अनुसार जातियों के हिसाब से फॉरवर्ड और बैकवर्ड एससी एसटी पिछड़े का जो संविधान ने पैमाना तय कर रखा है। उसके मुताबिक होगा तो ज्यादा तार्किक होगा। पिछड़ों, शोषितों की राजनीति के लिए जानी जाती है सपा
नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर का कहना है कि समाजवादी पार्टी पिछड़ों शोषितों के लिए जानी जाती है। आज हमारे शीर्ष नेतृत्व को यह बात जानने की जरूरत है कि मुसलमान में फॉरवार्ड बैकवर्ड है कि नहीं उसे हिसाब से तय होना चाहिए कि किस समाज के उत्थान के लिए काम करने की जरूरत है। नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि पूर्वांचल में 70% से ज्यादा पिछड़े मुसलमान हैं जिनमें नई दर्जी अंसारी और धोबी हैं उनकी बड़ी तादाद है। पूर्वांचल में ऐसा कोई नाम नहीं सुना जिसके उत्थान के लिए कोई कदम उठाया गया हूं पर कहीं ना कहीं गुमराह करने का काम किया जाता है। पिछड़ों अति पिछड़ों की हालत बहुत खराब है। आजादी के इतने वर्षों के बाद भी कल भी नाले पर खड़ा था। आज भी नाले पर खड़ा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

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