मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या धाम के लिए एक नई आध्यात्मिक परंपरा का शुभारंभ हुआ है। श्रीराम-जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि से विशेष प्रसाद अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि के लिए विधिवत रूप से रवाना किया गया। यह प्रसाद 27 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल नवमी यानी रामनवमी के दिन रामलला को अर्पित किया जाएगा। सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से प्रसाद को विधि-विधान के साथ मंदिरों में पूजन के बाद शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। इस दौरान पूरा परिसर “जय श्रीराम” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गूंज उठा। रिमझिम बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहा और वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक बना। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि यह पहल संत स्वरूप श्रद्धेय चंपतराय जी और राजेंद्र सिंह पंकज जी के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के भक्तों के बीच आध्यात्मिक एकता को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रसाद में ग्यारह मन धनिया की पंजीरी, लड्डू, फल, पंचमेवा, भगवान रामलला के वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री सहित सुगंधित द्रव्य शामिल हैं। इन्हें शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार तैयार कर एक विशेष रूप से सुसज्जित वाहन से अयोध्या भेजा गया है। कपिल शर्मा ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव सनातन धर्म की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले काशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बीच शिवरात्रि एवं होली पर भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की शुरुआत हो चुकी है। अब अयोध्या और मथुरा के बीच इस नई परंपरा से सनातन संस्कृति की त्रिवेणी और अधिक सशक्त होगी।

Leave a Reply