DniNews.Live

श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा का गठन, 27 सदस्य होंगे:खुद शंकराचार्य होंगे परमाध्यक्ष; अविमुक्तेश्वरानंद बोले- ये सभा चतुरंगिणी सेना को जमीन पर उतारेगी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के लिए 27 सदस्यीय ‘श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा’ का गठन कर दिया है। सोमवार को काशी के आश्रम में उन्होंने कहा- नवरात्रि के पावन पर्व पर पंचमी के शुभ दिन हम एक ‘श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा’ का गठन कर रहे हैं। ये सभा आंतरिक सभा है जो ‘श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी को अंतिम रूप देगी और जमीन पर उतारेगी। इसके लिए चतुरंगिणी का पंजीकरण और उसका नियम और उसके संचालन की पद्धति बनाना फिर देवताओं की भर्ती करना और फिर उनको पंजीकृत करके प्रशिक्षण देना। ये सब कार्य 27 सदस्यीय चतुरंगिणी सभा की ओर से किया जाएगा। अब जानिए कैसी होगी चतुरंगिणी सेना पहले जानिए शंकराचार्य को सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी… अब सनातन की सेना ‘नागा साधुओं’ को जानिए
सनातन की सेना ‘नागा साधुओं’ को कहा जाता है। 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने नागा साधुओं का गठन किया था। उन्होंने ‘अखाड़ा’ परंपरा शुरू की, जो शस्त्र और शास्त्र (ज्ञान) दोनों में निपुण थे। उन्हें विदेशी आक्रमणकारियों से हिंदू धर्म, संस्कृति और मंदिरों की रक्षा के लिए एक ‘योद्धा-संत’ के रूप में संगठित किया था, ये त्रिशूल, तलवार चलाने में निपुण थे। नागा साधुओं ने धर्म की रक्षा कब-कब की, इसके कुछ संदर्भ मिलते हैं। 1664 में काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए नागा साधु आगे आए थे। मध्यकाल में नागा साधुओं ने मुगलों और अफगान लुटेरों से मंदिरों की रक्षा की थी। ये संन्यासी होते हुए भी संकट के समय धर्म के लिए प्राण देने को तैयार रहते थे। नागा साधु अखाड़ों (जैसे जूना, निरंजनी) से जुड़े होते हैं, जिन्हें हिंदू धर्म की ‘सैन्य विंग’ के रूप में देखा जाता है। मौजूदा वक्त में नागा साधु महाकुंभ, अर्द्धकुंभ के आयोजन के दौरान नजर आते हैं। स्नान, पूजन होने के बाद वो फिर से अपने अखाड़ों और हिमालय पर्वतों पर लौट जाते हैं। चतुरंगिणी का मतलब क्या है?
चतुरंगिणी सेना का जिक्र प्राचीन भारत में है। महाभारत में भगवान कृष्ण की नारायणी सेना भी एक चतुरंगिणी सेना थी। यह चार मुख्य अंगों- हस्ती (हाथी), अश्व (घोड़े), रथ, और पदाति (पैदल सैनिक) से मिलकर बनती थी। शतरंज खेल का आधार भी इसी चतुरंगिणी सेना को माना जाता है। क्योंकि इस खेल में भी हाथी, घोड़े और पैदल सैनिक होते हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जानिए

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *