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आगरा में मेयर और अधिकारियों का टकराव खुलकर सामने आया:बिना एजेंडे के बुलाई बैठक; निगम प्रशासन ने पार्षदों को नहीं भेजी सूचना

आगरा नगर निगम में खींचतान बढ़ती जा रही है। यहां सियासत इस समय गर्म है। मेयर और अधिकारियों का टकराव खुलकर सामने आ गया है। अब सदन की बैठक को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने सोमवार सुबह 11 बजे सदन की बैठक बुलाने के निर्देश दिए। मगर, नगर निगम सचिवालय ने बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया। दरअसल, नगर निगम के अधिकारी बैठक टालने के पक्ष में हैं। अधिकारी उस शासनादेश का हवाला दे रहे हैं, जिसमें लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नगर निगम सदन आयोजित न करने की बात कही गई है। मेयर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार 23 मार्च को सामान्य सदन की बैठक बुलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके क्रम में 13 मार्च को विस्तृत नोटिंग प्रस्तुत कर सुझाव दिया गया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बजट सदन आयोजित करना अधिक उपयुक्त रहेगा, ताकि वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति से पहले नगर निगम का बजट पास कराया जा सके। अधिकारियों का ये है तर्क निगम अधिकारियों का कहना है कि इस नोटिंग पर अब तक कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है। इस बीच संसद का बजट सत्र 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चल रहा है।
शासनादेश के अनुसार इस अवधि में उन बैठकों से बचने के निर्देश हैं। जिनमें सांसद या विधायक सदस्य के रूप में नामित हों। 23 मार्च को ही आगरा में उत्तर प्रदेश विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति (2025-26) की बैठक प्रस्तावित है। इस उच्चस्तरीय बैठक में जनपद के कई अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है, जिससे नगर निगम की बैठक व्यावहारिक कठिनाइयां बढ़ गई हैं। इन परिस्थितियों में 23 मार्च यानी आज को प्रस्तावित सदन की बैठक का आयोजन फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में मेयर से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके, लेकिन देर रात तक कोई निर्देश जारी नहीं हुआ। ऐसे में नगर निगम की बैठक को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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