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लखनऊ में SIR का कार्य हुआ पूरा:शहर की नौ विधानसभा में 3.5 लाख नए वोटर जुड़े; अब 31.30 लाख वोटर्स हुए

लखनऊ में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। जहां एक ओर करीब साढ़े तीन लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं, वहीं दूसरी ओर अब साढ़े आठ लाख से ज्यादा नाम सूची से हटाए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक शहर में लगभग 100 प्रतिशत तक एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिससे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने का दावा किया जा रहा है।

39.85 लाख से घटकर सूची में हुआ बड़ा संशोधन
एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले लखनऊ में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 39.85 लाख थी। पुनरीक्षण के दौरान मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाया गया। इस प्रक्रिया में 12 लाख से अधिक नाम काटे गए थे। इसके बाद नए वोटर्स फॉर्म 6 से जुड़े। तो अब साढ़े आठ लाख हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया है। जिससे मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अधिकारियों का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया में वोटर्स के मतदान करने का आंकड़ा में अंतर नहीं आना चाहिए।

साढ़े तीन लाख नए मतदाताओं का हुआ पंजीकरण
पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नए मतदाताओं ने भी अपना नाम जुड़वाया। आंकड़ों के अनुसार करीब 3.5 लाख नए वोटर्स को सूची में शामिल किया गया है। इनमें पहली बार वोट डालने वाले युवा, नए शिफ्ट हुए नागरिक और पूर्व में छूटे हुए मतदाता शामिल हैं। इससे शहर की मतदाता संरचना में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

100 प्रतिशत तक पूरी हुई एसआईआर प्रक्रिया
प्रशासन ने बताया कि लखनऊ में एसआईआर की प्रक्रिया करीब 100 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है। शेष कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया, जिससे फर्जी और डुप्लीकेट नामों को हटाने में मदद मिली। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण रही।

नौ विधानसभा क्षेत्रों में रजिस्टर मतदाताओं का आंकड़ा चौंकाने वाला
लखनऊ की नौ विधानसभा सीटों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान रजिस्टर (अनमैप्ड) मतदाताओं के आंकड़े भी सामने आए हैं, जो कई क्षेत्रों में चिंता बढ़ाने वाले हैं। राजधानी के शहरी इलाकों में यह प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा कुछ कम है।
सबसे अधिक ट्रैक न होने वाले मतदाता लखनऊ पूर्व विधानसभा में सामने आए हैं, जहां 18.25 प्रतिशत यानी कुल 84,449 मतदाताओं का पंजीकरण नहीं हो पाया है। इसके बाद लखनऊ पश्चिम विधानसभा दूसरे स्थान पर है, जहां 16.58 प्रतिशत (77,969) मतदाता सूची से बाहर हैं। वहीं लखनऊ उत्तर विधानसभा में 15.98 प्रतिशत यानी 79,731 मतदाताओं का नाम सूची में नहीं जुड़ सका है।
लखनऊ मध्य विधानसभा में भी 13.98 प्रतिशत (51,998) मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है। राजनीतिक रूप से अहम इन शहरी सीटों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं का सूची से बाहर होना चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत कुछ कम है। बक्शी का तालाब विधानसभा में 9.53 प्रतिशत (47,164), सरोजिनी नगर विधानसभा में 9.35 प्रतिशत (56,311) और लखनऊ कैंट विधानसभा में 8.15 प्रतिशत (29,790) मतदाता अपंजीकृत पाए गए हैं।
इसी तरह मलिहाबाद विधानसभा (आरक्षित) में 7.81 प्रतिशत (28,773) और मोहनलालगंज विधानसभा (आरक्षित) में सबसे कम 6.65 प्रतिशत (23,859) मतदाता ऐसे हैं, जिनका पंजीकरण नहीं हो पाया है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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