संभल में चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन सिद्धपीठ मां चामुंडा देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। मां कुष्मांडा की महाआरती में 500 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर के महंत मुरली सिंह के अनुसार, पूरे दिन में 2000 से अधिक भक्तों ने मां दुर्गा के दर्शन किए। मंदिर में नौ दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है और मां के भवन को फूलों से सजाया गया है। रविवार रात 8 बजे संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला हल्लू सराय स्थित सिद्धपीठ मां चामुंडा देवी मंदिर में चौथे नवरात्र पर मां दुर्गा की आराधना की गई। महाआरती का आयोजन रात 9:15 बजे तक चला, जिसके बाद रात 12 बजे मंदिर के कपाट बंद किए गए। इस दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जिन्हें ब्रह्मांड की रचयिता माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से शून्य में ब्रह्मांड की रचना की थी। मां कूष्मांडा की अष्टभुजा वाली दिव्य प्रतिमा की पूजा से आयु, यश, बल और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। मंदिर में मां दुर्गा का प्रतिदिन श्रृंगार किया जा रहा है। श्रद्धालु मां ज्वाला देवी से लाई गई दिव्य ज्योत के दर्शन कर रहे हैं और कई भक्त अखंड ज्योत अपने घरों को लेकर गए। श्रद्धालु शिवम गुप्ता ने बताया कि यह संभल शहर का एक प्राचीन मंदिर है, जहां नवरात्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। एक अन्य श्रद्धालु ललित ठाकुर ने कहा कि मंदिर लाइटों की रोशनी से जगमगा रहा है और मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं की भक्ति से गूंज रहा है। महिला श्रद्धालु आशा रुहेला ने इस मंदिर की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यहां चौथे नवरात्रि की पूजा की विशेष मान्यता है।यह भी बताया गया कि संभल शहर के बसने के समय से ही मां चामुंडा देवी का यह स्थान है और यह सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी रही हैं। संभल पृथ्वीराज चौहान की राजधानी भी रहा है।

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