लखनऊ छावनी के खेल परिसर में आयोजित अवध मेले में देशभक्ति और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। इस कार्यक्रम में हजारों सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति ने एक विशेष माहौल तैयार किया। पद्मश्री अनूप जलोटा और सुरभि रंजन को प्रतिष्ठित ‘नौशाद सम्मान’ से नवाजा गया। इनके साथही , समीर-दीपाली, समरजीत रंधावा, शीर्षा रक्षित और बिसरूप बनर्जी को भी ‘शान-ए-अवध’ सम्मान प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता और मेजर जनरल मनीष कुकरेती ने कलाकारों को सम्मानित किया। अनूप जलोटा के भजन पर झूमे श्रोता इस आयोजन को हुनर क्रिएशन एंड क्राफ्ट एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश पर्यटन और उप्र संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराया।कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री अनूप जलोटा ने अपने प्रसिद्ध भजन ‘ऐसी लागी लगन’ से की। उन्होंने ‘अच्युतम केशवम’, ‘मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे’ और ‘मैं शायर तो नहीं’ जैसे गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया। उनकी प्रस्तुति का समापन ‘जीना यहां मरना यहां’ गीत के साथ हुआ। इसके बाद समीर-दीपाली की जोड़ी ने मंच संभाला और ‘जाने जां ढूंढता फिर रहा’, ‘जीवन के हर मोड़ पे’ और ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ जैसे गानों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके मैडले में ‘दम मारो दम’, ‘सारा जमाना हसीनों का दीवाना’ और ‘लैला ओ लैला’ जैसे गीतों ने माहौल में नई ऊर्जा का संचार किया। ‘झूम झूम बाबा’ जैसे गीतों से जवानों का मन मोह लिया संयोजक जफर नबी और विवेक शुक्ल के कुशल संचालन में दीपांशी यादव ने भी अपनी गायकी का प्रदर्शन किया। उन्होंने ‘इंतिहा हो गई इंतजार की’ और ‘झूम झूम बाबा’ जैसे गीतों से जवानों का मन मोह लिया।मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और विभिन्न प्रकार के खाने-पीने के स्टॉल भी लगाए गए थे, जिससे परिवारों ने भी इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

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