लखनऊ में विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘जल एवं लैंगिक समानता’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र ने 22 मार्च को इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें जल के महत्व और उसके संरक्षण पर जागरूकता बढ़ाने पर चर्चा हुईं । प्रतिवर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल के महत्व को समझाना और स्वच्छ व सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस वर्ष की थीम ‘जल एवं लैंगिक समानता’ थी, जिसमें जल प्रबंधन में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी आवश्यक कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल से संबंधित अधिकांश कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं। पानी की कमी के कारण उन्हें अक्सर दूर से पानी लाना पड़ता है, जिसका उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। मुख्य वक्ता स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, लखनऊ के निदेशक आर. के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल से संबंधित नीतियों और योजनाओं में महिलाओं को शामिल करने से अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त होते हैं और जल संरक्षण को बल मिलता है। पुस्तक ‘ग्राउंडवाटर मैनेजमेंट का विकसित भारत @2047’ का विमोचन किया गया इस अवसर पर आर. सी. श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘ग्राउंडवाटर मैनेजमेंट का विकसित भारत @2047’ का विमोचन भी किया गया, जो कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा।कार्यक्रम की अध्यक्षता मसर्रत नूर खान ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों और नवाचारों का उपयोग कर जल संकट के समाधान में अपना योगदान दें।कार्यक्रम का संचालन सैय्यद इरफान अनवर ने किया। उन्होंने बताया कि संस्था भविष्य में भी जल संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक समानता से संबंधित ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी।

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