बाबा विश्वनाथ के गंगाद्वार पर स्थित ललिता घाट जहां मंदिर न्यास द्वारा गंगा आरती के चौथे दिन वीकेंड पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के बाद गंगा घाट पहुंचे और मां गंगा की आरती आरती देखी। मंदिर प्रशासन ने आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि आज बाबा के दरबार में साढ़े 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए आज पांच द्वारा से प्रवेश दिया गया। अब जानिए गंगा आरती तक पहुंचने और वापसी का मार्ग पहला रास्ता – गेट नंबर 4 से मोबाइल लेकर सीधे गंगा आरती स्थल पहुंचेंगे। विश्वनाथ मंदिर की गंगा आरती में पहुंचने और वापसी के लिए भक्तों के पास चार रास्ते हैं। एक तो गेट नंबर चार से आने वाले भक्त मोबाइल के साथ सीधे शंकराचार्य चौक होते हुए गंगा द्वार से बाहर निकलकर गंगा आरती में शामिल होंगे। वहीं अन्य रास्तों सरस्वती फाटक, गेट नंबर 4 और नंदू फेरिया, ढूंढीराज गणेश से प्रवेश करने वाले भक्त भी उसी रास्ते से ललिता घाट पहुंच सकेंगे हालांकि उनका मोबाइल बाहर ही जमा होगा। लेकिन इस रास्ते से मोबाइल लेकर वापसी संभव नहीं हो पाएगी। दूसरा रास्ता – दशाश्वमेध घाट से करीब 500 मीटर की दूरी तय करके ललिता घाट पहुंचा जा सकता है और इसी से वापसी भी हो सकती है। तीसरा रास्ता – मां विशालाक्षी मंदिर से मीरघाट होते हुए भी सीधे ललिता घाट तक भक्त पहुंच और वापसी भी हो सकती है। गंगा आरती में है कष्टहरण का गुण- प्रो. विनय पांडेय बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्राे. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि गंगा आरती एक पूर्ण वैदिक प्रक्रिया है। आरती का अर्थ होता है कष्टहरण। इसमें शामिल होने से जीवन और शरीर दोनों के कष्ट दूर होते हैं। पूजा की पूर्णता आरती के बाद ही होती है। पितरों की आत्मा को मोक्ष मिल जाता है। अति सत्कार का दिन है। आरती लेने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं। ये पुनीत कार्य है। अर्चक करने वालों को सनातनी और सात्विक होना जरूरी है। मांसाहार न हों।

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