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काकोरी में लूट की 2 वारदात का खुलासा:यक्ष ऐप से पकड़ में आए आरोपी, बाइक व मोबाइल बरामद

लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में गुरुवार को हुई लूट की 2 घटनाओं का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लूटी गई बाइक, मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल दूसरी बाइक बरामद की है। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया रहीमाबाद के अटेर मजरा निवासी सुमित तिवारी ने सूचना दी थी कि हरदोई रोड स्थित रोशन लॉन के सामने 4 अज्ञात बदमाशों ने मारपीट कर उनकी बाइक और पोको कंपनी का मोबाइल लूट लिया। इस दौरान काकोरी के मौंदा गांव निवासी मनोज से भी मौंदा पेट्रोल पंप के पास बदमाशों ने बाइक और पर्स लूट लिया था। 4 टीमें गठित कर शुरू की गई छानबीन दोनों घटनाओं को दर्ज करके आरोपियों की तलाश में चार टीमों का गठन किया गया। सीसीटीवी में आरोपियों के कुछ फुटेज मिले, जिसे यक्ष ऐप पर डाला गया। उस पर डालते ही मिलते-जुलते कुछ अपराधी मिले। इस दौरान एक एसआई ने एक आरोपी को पहचान लिया, जो मलिहाबाद की घटना में शामिल था। यक्ष ऐप से उसका आपराधिक इतिहास निकाला गया। आरोपी की पहचान अजय पुत्र विजय निवासी दुर्गागंज काकोरी के रूप में हुई। उसके मोबाइल की लोकेशन घटना के समय दोनों स्थानों के आसपास पाई गई। जिससे उसकी संलिप्तता की पुष्टि हुई।
रविवार देर रात नरौना नहर मोड़ पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने अजय और उसके साथी दीपांशु उर्फ लक्की राजपूत को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर लूट की वारदातों को अंजाम देना कबूल किया। पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटी गई एक बाइक, दोनों घटनाओं के मोबाइल फोन, दस्तावेज और वारदात में इस्तेमाल की गई दूसरी बाइक बरामद की। पुलिस का कहना है कि गिरोह के बाकी दो सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। क्या है यक्ष ऐप
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 में पुलिस की कार्यप्रणाली को स्मार्ट और डिजिटल बनाने के लिए AI-आधारित ‘यक्ष’ (YAKSH) ऐप लॉन्च किया था। डीजीपी राजीव कृष्ण ने यक्ष ऐप का ट्रेनिंग प्रोग्राम कराया था। इस ऐप में अपराधियों की लोकेशन, उनके नेटवर्क और अपराध के पैटर्न की जानकारी महज एक क्लिक पर मिल जाती है। ऐप में अपराध की एंट्री होती है। अपराधी से संबंधित सभी बीटों और थानों को एआई के माध्यम से तुरंत सूचना मिल जाती है। सभी बीटों की डिजिटल घेराबंदी जीओ-फेंसिंग की गई है, जिससे कांस्टेबल की जिम्मेदारी थी। पुरानी डायरी की जगह अब रियल टाइम अपडेट वाली डिजिटल बीट बुक का इस्तेमाल होता है। चेहरा, आवाज टेक्स्ट और वाहन सर्च की सुविधा से अपराधियों को पकड़ना आसान हो रहा। इसमें फेस-सर्च, क्रिमिनल स्कोरिंग और क्राइम-जीपीटी जैसे एडवांस फीचर्स शामिल हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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