चित्रकूट के राजाघाट को बुंदेली सेना ने तीन दिवसीय अभियान चलाकर साफ कर दिया है। करोड़ों की लागत से बने इस घाट पर गंदगी और प्रदूषण के कारण नदी की स्थिति खराब हो गई थी। अब बुंदेली सेना ने नगर पालिका से घाट से मिट्टी हटवाने और विसर्जन कुंड बनवाने की मांग की है ताकि लोग सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें और घाट का निर्माण सार्थक हो सके। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि नए बने घाट की दुर्दशा देखकर उन्होंने इसे साफ करने का लक्ष्य रखा था। अभियान के बाद घाट पूरी तरह स्वच्छ हो गया है। हालांकि, घाट निर्माण के बाद मिट्टी नहीं हटाई गई, जिससे सीढ़ियों के बाद दलदल बन गया है। अजीत सिंह ने नगर पालिका के ईओ से इस मिट्टी को हटवाने का अनुरोध किया है। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि लोग पूजन सामग्री नदी में न फेंकें, इसके लिए जल्द से जल्द एक विसर्जन कुंड का निर्माण कराया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि धुस मैदान में पानी की टंकी के आसपास के घरों का गंदा पानी नाली के जरिए राजाघाट की ओर आता है। इस समस्या के समाधान के लिए बुंदेली सेना की मांग पर तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने नाली में फिल्टर का निर्माण कराया था। हालांकि, घाट निर्माण के समय नगर पालिका ने उस फिल्टर का आधा हिस्सा तोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप, गंदा पानी सीधे इंटेक वेल के पास गिर रहा है, जो पेयजल के लिए खतरनाक है। अजीत सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो बुंदेली सेना राजाघाट में धरना प्रदर्शन करेगी। बुंदेली सेना ने घोषणा की है कि राजाघाट के बाद वे पुलघाट और फिर रामघाट में भी सफाई अभियान चलाएंगे। उन्होंने लोगों से नदी को साफ रखने के लिए पूजन सामग्री नदी किनारे रखने या भू-विसर्जन करने की अपील की है। इस सफाई अभियान में धर्मेंद्र ओझा, चुन्नीलाल निषाद, सुरेन्द्र सिंह शेरा, रामनरेश यादव, अंकित पहरिया और कमल छबलानी सहित कई सदस्यों का सहयोग रहा।

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