राजनीति में प्रवेश करने के लिए किसी विशेष पढ़ाई की जरूरत नहीं होती है। बल्कि सियासत में आने के लिए भाग्य की जरूरत होती है। सफल और लोकप्रिय राजनेता बनने के लिए कुंडली में कुछ विशेष ग्रह और नक्षत्रों का प्रबल होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य के बाद चंद्रमा का विचार किया जाता है। लेकिन राजनीति के संदर्भ में सूर्य के बाद राहु का विचार किया जाता है। क्योंकि राहु ही जातक को अचानक कोई कार्य कराता है। राहु की वजह से जातक अचानक राजनीति में प्रवेश करता है।
कुंडली में राहु का प्रभाव
राहु के प्रभाव से जातक नीतियों का निर्माण करने और उनको लागू करने की योग्यता रखता है। राहु के प्रभाव से ही जातक में स्थिति के हिसाब से बात और व्यवहार की कला आती है। राहु जातक को सियासी दांव-पेंच और पैंतरे सिखाता है। राहु प्रधान जातक एक कुशल कूटनीतिज्ञ होता है। कलियुग में राहु के विशेष प्रभाव राजनीति संदर्भ में जल्द ही दृष्टिगोचर होता है। सियासत से जुड़े लोगों की कुंडली में राहु मजबूत होता है और इन लोगों को शीघ्र सफलता मिलती है।
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ज्योतिष में राहु का दर्जा
ज्योतिष में राहु को सभी ग्रहों में नीति कारक ग्रह का दर्जा दिया जाता है। अगर जन्मकुंडली की बात की जाए, तो सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु का संबंध तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में होने पर गोचर में अनुकूल राहु अपनी महादशा में जातक को बुलंदियों पर पहुंचाता है। कुंडली में राहु का शुभ होना जातक को राजनीति में सफलता दिलाने की प्रबल संभावना रखता है। जैमिनी सूत्र से देखा जाए, तो राहु के अमात्य कारक होने से जातक की रुचि राजनीति में होती है और वह इस क्षेत्र में सफलता पाने की भी संभावना रखता है।
सुयोगों के जरिए से राजनीति में जातक अपना और पार्टी का प्रभुत्व स्थापित कर सकता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में जितने ज्यादा सुयोग होंगे, उसकी राजनीति में उतनी ही ज्यादा रुचि होगी। वहीं राजनीति में उसको उतनी ही ज्यादा सफलता और मान-सम्मान मिलेगा। अन्य कारोबार और करियर की तरह ही राजनीति में भी जाने वालों की कुंडली में ज्योतिष योग होते हैं।
राजनीति में सफल होने वाले जातकों की कुंडली में ग्रहों का विशिष्ट संयोग देखने को मिलता है। हर किसी के भाग्य में राजनेता बनना नहीं होता है। राजनेता और कार्यकर्ता सभी ग्रह योग के आधार पर अपनी किस्मत को आजमाना चाहते हैं। बता दें कि कुंडली के 10वें घर को राजनीति का घर कहते हैं। वहीं सत्ता में भाग लेने के लिए 10वें घर का स्वामी यानी दशमेश या दशम भाव में उच्च ग्रह विराजमान होना चाहिए। वहीं लग्न का राहु जातक को चाणक्य के समान बुद्धि और बल प्रदान करता है, जो उनको अन्य प्रत्याशियों से कॉम्पटीशन करने की ऊर्जा देते हैं।
राहु एक ऐसा ग्रह है, जो अंतिम समय में परिणाम बदल देता है। इसलिए आपने अक्सर राजनेताओं को राहु का रत्म गोमेद धारण किए देखा होगा। गोमेद की खासियत है कि यह शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है। वहीं कलियुग में राहु विस्तार का कारक है और विस्तार की कोई सीमा नहीं होती है। राजसत्ता के जरिए जातक न सिर्फ खुद बल्कि देश का असीमित विकास और विस्तार कर सकता है। राजसत्ता, राजपक्ष या राजनीति से जुड़े लोगों की कुंडली में पंचमहापुरुष जैसे अनेक राजयोग देखने को मिलते हैं।
कुंडली के पूर्ण अध्ययन के बाद अगर ज्यादातर योग चुनाव प्रत्याशी के जन्मांग में उपस्थित हों और कालसर्प, केमद्रुम, राजभंग, ज्वालामुखी या अशुभ योग कम हों। तो ऐसा चुनाव में खड़ा प्रत्याशी खुद को सफल राजनेता समझ सकता है।
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