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Mahashivratri Puja Rules: नवविवाहित जोड़े महाशिवरात्रि के दिन सत्यनारायण कथा करा सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहते हैं धार्मिक शास्त्र

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था। ऐसे में ये दिन गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने के लिए नविवाहित जोड़े के लिए सबसे शुभ होता है। इसलिए कई सारे लोग नवविवाहित जोड़े के लिए कथा रखवाते हैं, जिससे भगवान की कृपा बनीं रहे। यदि आप भी इस बार महाशिवरात्रि के दिन कथा करवाने की सोच रहे हैं, तो जान लें यह शुभ है या नहीं।
क्या महाशिवरात्रि पर सत्यनारायण कथा करना शुभ है?
 – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और भगवान विष्णु एक-दूसरे के पूरक और एक-दूसरे के परम भक्त हैं। महाशिवरात्रि एक महापर्व है और इस दिन पूजा पाठ का काफी महत्व होता है। इसलिए इस दिन कथा जैसा शुभ कार्य कराया जा सकता है, जिससे आपके जीवन में खुशहाली बनीं रहे।
– यदि आपकी नई-नई शादी हुई है और आप अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, तो सत्यनारायण भगवान की कथा और व्रत करना चाहते हैं, तो महाशिवरात्रि का दिन इसके लिए अत्यंत शुभ है।
सत्यनारायण की कथा कराने से क्या शुभ फला प्राप्त होते हैं?
  – नवविवाहित कपल इस दिन कथा सुनते हैं, तो उनको शिव-शक्ति और लक्ष्मी-नारायण दोनों का आशीर्वाद मिलता है, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती हैं। 
 – जो लोग सत्यनारायण कथा सत्य और ईमानदारी का मार्ग दिखाती है। इसे सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी तालमेल बेहतर होता है।
– जो जोड़े संतान प्राप्ति की चाहत रखते हैं या सुख-समृद्धि की कामना रखते हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि पर यह कथा सुनना मनोकामना पूर्ति का साधन बनती हैं।
पूजा के दौरान इन बातों रखें का ध्यान
– सत्यनारायण कथा शाम के समय( प्रदोष काल) में या पूर्णिमा के दिन की जाती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इसे सुबह या दोपहर में भी किया जा सकता है, जिससे संध्या समय शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक और पूजा करना संभव हो सके।
 – कथा से पहले या बाद में भगवान शिव का रुद्राभिषेक या जलाभिषेक जरुर करें।
 – सत्यनारायण कथा के दिन पति-पत्नी दोनों का सात्विक आहार लेना चाहिए और पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत का पालन करना चाहिए।


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