धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। भगवान शिव शनि देव के गुरु है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन आती है, तो इसे ‘शनि प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से जूझ रहे हैं। इस बार फरवरी में शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी यानी के आज मनाया जा रहा है, जो महाशिवरात्रि से ठीक एक दिन पहले होने के कारण से और भी प्रभावशाली माना जा रहा है।
शनि प्रदोष का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) के बाद महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है और सिंह व धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव है। इस शनिवार और त्रयोदशी का यह मेल शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने का सबसे उत्तम समय माना गया है।
साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर करने के उपाय
पीपल के नीचे दीपदान
शनिवार को शाम के समय पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा शनि देव का निवास होता है, इसलिए इस दिन इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
शनि मंत्रों का जाप
इस दिन ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और रुके हुए कामों में धीरे-धीरे प्रगति होने लगती है।
छाया दान की विधि
आप कांसे या स्टील की एक छोटी कटोरी में सरसों का तेल भरें और उसमें अपना चेहरा देखें। इसके बाद उस तेल को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें या शनि मंदिर में अर्पित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से कष्ट कम होते हैं और शनि की कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान चालीसा का पाठ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शनि देव ने हनुमान जी से वादा किया था कि जो भक्त हनुमान जी की सच्चे मन से आराधना करेगा, उसे शनि की बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। यही कारण है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।
दान का विशेष फल
इस दिन आप काले कपड़े, काली उड़द दाल, कंबल, छाता या जूतों का दान करने से राहु-केतु और शनि के दोष शांत होते हैं। इस दिन गरीब और असहाय लोगों की मदद करना शनि देव को सबसे अधिक प्रिय माना जाता है।
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